सुशासन तिहार से किसानों के जीवन में आई समृद्धि, केसीसी बना आर्थिक आजादी का जरिया

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में प्रशासन की ‘सुशासन’ पहल अब ग्रामीण इलाकों में सकारात्मक बदलाव ला रही है। ग्राम हल्बारास में आयोजित हालिया जनसमस्या निवारण शिविर, जिसे ‘सुशासन तिहार’ के रूप में मनाया गया, किसानों के लिए न केवल राहत बल्कि प्रगति का नया अवसर लेकर आया। इस आयोजन का मुख्य केंद्र किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का वितरण रहा, जिसने खेती की लागत और ऋण की समस्याओं से जूझ रहे किसानों को एक नई उम्मीद दी है।
संसाधनों की कमी अब नहीं बनेगी बाधा
शिविर में ग्राम हल्बारास के किसान श्री हिराधर भागरथी को जब उनका केसीसी कार्ड मिला, तो उनके चेहरे पर भविष्य की निश्चिंतता साफ दिखी। 7 एकड़ भूमि के स्वामी श्री भागरथी ने बताया कि जमीन होने के बावजूद पूंजी के अभाव में वे खेती का विस्तार नहीं कर पा रहे थे।
उन्नत कृषि की ओर कदम: अब बैंक से आसान ऋण मिलने के कारण वे समय पर खाद, बीज और आधुनिक मशीनों का इंतजाम कर सकेंगे।
विविधीकरण: उन्होंने साझा किया कि केसीसी की मदद से अब वे केवल धान तक सीमित न रहकर नकदी फसलों की खेती करेंगे, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।
साहूकारी कर्ज से मिली मुक्ति
एक अन्य किसान, श्री नवल सिंह राणा, जो अपना कार्ड नवीनीकरण (Renewal) कराने पहुंचे थे, ने इस योजना को किसानों के लिए “सुरक्षा कवच” बताया। उनके अनुसार:
ब्याज का बोझ कम: केसीसी ने किसानों को निजी साहूकारों के ऊंचे ब्याज और उनके चंगुल से पूरी तरह मुक्त कर दिया है।
बहुआयामी लाभ: श्री राणा ने बताया कि इस ऋण का उपयोग उन्होंने न केवल फसल के लिए, बल्कि पशुपालन के लिए भी किया, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हुई है।
प्रशासन की संवेदनशीलता और पारदर्शिता
यह शिविर इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासन स्वयं जनता के द्वार तक पहुँचता है, तो सरकारी योजनाओं का लाभ कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक भी पारदर्शी तरीके से पहुँचता है।
निष्कर्ष: सुशासन तिहार के माध्यम से दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि किसान केवल अन्नदाता ही न रहें, बल्कि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और तकनीक से लैस उद्यमी भी बनें। केसीसी की यह शक्ति आज दंतेवाड़ा के किसानों को आधुनिक खेती के एक नए युग में ले जा रही है।
















