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अमेरिका-ईरान तनाव : ट्रंप ने दी ईरान को ’47 सालों का हिसाब’ चुकता करने की चेतावनी

वाशिंगटन/तेहरान (एजेंसी)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कड़वाहट अब एक नए शिखर पर पहुँच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि तेहरान द्वारा अमेरिका का उपहास उड़ाने के दिन अब समाप्त हो चुके हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपनी बात रखते हुए ट्रंप ने साफ किया कि पिछले करीब पाँच दशकों से चली आ रही ईरान की रणनीतियाँ अब और नहीं चलेंगी।

ट्रंप का कड़ा रुख: “अब हंसी गायब होने वाली है”

राष्ट्रपति ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान पिछले 47 वर्षों से केवल ‘वक्त बिताने’ और ‘देरी करने’ की नीति पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि तेहरान ने लंबे समय तक अमेरिका और वैश्विक समुदाय की आँखों में धूल झोंकी है, लेकिन अब वह वक्त आ गया है जब उसे अपनी हरकतों का परिणाम भुगतना होगा। ट्रंप का यह बयान ईरान के उस शांति प्रस्ताव के बाद आया है, जो पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुँचाया गया था।

ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में लिखा:

“ईरान हमारे महान राष्ट्र पर हंस रहा था, लेकिन अब उसकी यह हंसी गायब होने वाली है। अब कोई खेल नहीं होगा।”

शांति प्रस्ताव और ईरान की शर्तें

ईरान की ओर से आए जवाब में संघर्ष विराम (Ceasefire) की इच्छा जताई गई है, लेकिन इसके साथ ही कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार:

क्षेत्रीय शांति: ईरान चाहता है कि लेबनान सहित सभी युद्धग्रस्त मोर्चों पर तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकी जाए।

समुद्री सुरक्षा: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी शर्तें रखी गई हैं।

हालांकि, अमेरिका ने पूर्व में कहा था कि परमाणु कार्यक्रम जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा से पहले ईरान को शत्रुता पूर्ण रवैया छोड़ना होगा। वर्तमान में व्हाइट हाउस ने ईरान की इन नई शर्तों पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है।

ओबामा प्रशासन पर निशाना: “ईरान को थाली में सजाकर दी मदद”

अपने आक्रामक संबोधन में ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की नीतियों की भी जमकर आलोचना की। ट्रंप का दावा है कि ओबामा के कार्यकाल में हुआ परमाणु समझौता ईरान के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह था, जिसने उसे आर्थिक और सैन्य रूप से मजबूत होने का अवसर दिया।

ट्रंप ने आरोप लगाया कि:

ओबामा प्रशासन ने इजरायल जैसे सहयोगियों की अनदेखी करते हुए ईरान का पक्ष लिया।

अरबों डॉलर की नकद राशि ईरान भेजी गई, जिससे उसे क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने की ताकत मिली।

अब समय आ गया है कि इन सभी पुरानी गलतियों और ईरान की चालबाजियों का पूर्ण हिसाब लिया जाए।

निष्कर्ष: डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की राजनीति और अधिक गरमाने वाली है। अमेरिका अब कूटनीति के बजाय ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (अधिकतम दबाव) की नीति पर लौटता दिख रहा है।

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