धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित : अभिनय और नृत्य के 59 सुनहरे साल

मुंबई (एजेंसी)। भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित अभिनेत्रियों में से एक, माधुरी दीक्षित ने हाल ही में अपना जन्मदिन मनाया। 15 मई 1967 को मुंबई के एक मध्यमवर्गीय मराठी परिवार में जन्मी माधुरी का शुरुआती रुझान फिल्मों की तरफ नहीं था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद माइक्रोबायोलॉजी की पढ़ाई के लिए कॉलेज में दाखिला लिया था। इसके साथ ही उन्होंने लगभग आठ वर्षों तक कत्थक का औपचारिक प्रशिक्षण भी लिया, जो बाद में उनकी पहचान बना।
शुरुआती सफर और पहली सफलता
माधुरी ने अपने अभिनय सफर की शुरुआत साल 1984 में राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्म ‘अबोध’ से की थी। हालांकि, उस समय सिनेमा में उनका कोई बड़ा करियर बनाने का इरादा नहीं था और फिल्म की शूटिंग के बाद वह वापस अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गईं। भले ही ‘अबोध’ बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, लेकिन फिल्म समीक्षकों और निर्माताओं ने उनकी प्रतिभा को भांप लिया। इसके बाद लगातार मिल रहे प्रस्तावों को देखते हुए उन्होंने पढ़ाई छोड़कर पूरी तरह अभिनय को अपना करियर चुन लिया।
साल 1988 में आई फिल्म ‘तेजाब’ माधुरी के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। अनिल कपूर के साथ उनकी केमिस्ट्री और विशेष रूप से उन पर फिल्माया गया गाना ‘एक दो तीन’ रातों-रात ब्लॉकबस्टर हो गया, जिसने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में एक नई पहचान दिलाई।
सफलता का दौर और ऐतिहासिक रिकॉर्ड
‘दिल’ (1990): आमिर खान के साथ आई इस सुपरहिट फिल्म के लिए माधुरी को उनके करियर का पहला सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
करियर का स्वर्णिम वर्ष (1991): इस साल उनकी ‘साजन’, ‘100 डेज’ और ‘प्रहार’ जैसी बेहतरीन फिल्में रिलीज हुईं, जिन्होंने उन्हें बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्रियों में ला खड़ा किया।
‘बेटा’ (1992): इस फिल्म में उनके दमदार अभिनय और नृत्य ने दर्शकों को दीवाना बना दिया।
‘हम आपके हैं कौन’ (1994): सलमान खान के साथ पारिवारिक पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म ने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इसका गाना ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’ हर जुबान पर चढ़ गया। 90 के दशक में माधुरी बॉलीवुड की सबसे महंगी (हाईएस्ट पेड) अभिनेत्री बनीं, जिसके कारण उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हुआ।
यादगार किरदार और सम्मान
साल 2002 में संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘देवदास’ में उनके द्वारा निभाया गया ‘चंद्रमुखी’ का किरदार आज भी मील का पत्थर माना जाता है। इस बेहतरीन अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के पुरस्कार से नवाजा गया। सिनेमा जगत में उनके अद्वितीय योगदान को सम्मान देते हुए भारत सरकार ने साल 2008 में उन्हें पद्मश्री से विभूषित किया।
करियर की दूसरी पारी
साल 2002 में ‘हम तुम्हारे हैं सनम’ के बाद उन्होंने डॉ. श्रीराम नेने से शादी कर ली और कुछ समय के लिए फिल्मों से दूरी बना ली। साल 2007 में उन्होंने ‘आजा नच ले’ से वापसी की कोशिश की, लेकिन फिल्म को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके बाद साल 2013 की फिल्म ‘ये जवानी है दीवानी’ के एक विशेष गीत से उन्होंने शानदार कमबैक किया। तब से लेकर अब तक वह ‘डेढ़ इश्किया’, ‘गुलाब गैंग’, ‘कलंक’, ‘टोटल धमाल’, मराठी फिल्म ‘बकेट लिस्ट’ और हाल ही में ‘भूल भुलैया 3’ जैसी फिल्मों में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेर चुकी हैं।
















