नवा रायपुर में घर खरीदने के नियमों में ढील : अब कोई भी वर्ग ले सकेगा खाली पड़े फ्लैट्स

रायपुर। नवा रायपुर के सेक्टर-16, 30 और 34 में लंबे समय से वीरान पड़ी आवासीय सोसायटियों को आबाद करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्मित ईडब्ल्यूएस (EWS) तथा एलआईजी (LIG) फ्लैट्स की बिक्री की रफ्तार बढ़ाने के लिए नियमों को काफी उदार बना दिया गया है।
नए नियमों से बढ़ेगी बसाहट
नए प्रावधानों के अनुसार, यदि आवासों के लिए तीन बार टेंडर या विज्ञापन निकालने के बाद भी वे नहीं बिकते हैं, तो उन्हें किसी भी आय वर्ग के नागरिकों, कॉर्पोरेट कंपनियों या निजी व सरकारी संस्थाओं को बेचा जा सकेगा। शासन को उम्मीद है कि इस फैसले से सुनसान पड़ी कॉलोनियों में चहल-पहल लौटेगी और वहां सुरक्षा व जन-सुविधाएं बेहतर होंगी।
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
मंडल द्वारा बनाए गए बहुमंजिला आवासों की स्थिति पर नजर डालें तो आंकड़े इसकी वजह साफ करते हैं:
निर्माण की शुरुआत: यह आवासीय परियोजना साल 2015 में शुरू की गई थी, जिसके तहत पहले चरण में 6,296 फ्लैट्स तैयार किए जाने थे।
आवंटन की स्थिति: दिसंबर 2025 तक केवल 3,146 फ्लैट्स ही आवंटित हो पाए।
रद्दीकरण का नुकसान: विभिन्न वजहों से 3,335 आवंटियों ने अपने मकान सरेंडर कर दिए। खाली पड़े इन मकानों में लगातार चोरी और टूट-फूट की घटनाएं सामने आ रही थीं, जिससे हाउसिंग बोर्ड को वित्तीय घाटा झेलना पड़ रहा था।
इसी वित्तीय और व्यावहारिक संकट को दूर करने के लिए 14 नवंबर 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में नियमों को शिथिल करने की मंजूरी दी गई थी।
मूल लाभार्थियों के अधिकार रहेंगे सुरक्षित
महत्वपूर्ण बात: सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस नीतिगत बदलाव से आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के मूल हकदारों के अधिकारों में कोई कटौती नहीं होगी। पात्र परिवारों को केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाली सब्सिडी (अनुदान) की राशि पहले की तरह ही मिलती रहेगी।
संस्थागत खरीदारों के लिए शर्तें
चूंकि ये बहुमंजिला इमारतें हैं, इसलिए इनमें किसी भी तरह के स्ट्रक्चरल या ढांचागत बदलाव की अनुमति नहीं होगी। जो भी सरकारी, अर्ध-सरकारी या निजी संस्थान अपने कर्मचारियों के लिए थोक (बल्क) में ये फ्लैट्स खरीदेंगे, उन्हें इनका उपयोग केवल आवासीय उद्देश्य के लिए ही करना होगा।
फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग, जीएसटी विभाग, मेफेयर होटल ग्रुप और कुछ शिक्षण संस्थानों ने इन फ्लैट्स को खरीदने की इच्छा जताई है। वर्तमान में लगभग 500 फ्लैट्स बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, जिन्हें तय दरों पर “पहले आओ, पहले पाओ” की नीति के तहत ऑनलाइन बुक किया जा सकता है।
















