रुपये के मूल्य में उतार-चढ़ाव : अरविंद पनगढ़िया ने दी केंद्रीय बैंक को बाजार से दूर रहने की सलाह

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और जाने-माने अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने देश के केंद्रीय बैंक (RBI) को भारतीय मुद्रा के मामले में बाजार के स्वाभाविक बहाव में दखल न देने का सुझाव दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया (एक्स) पर अपनी राय साझा करते हुए कहा कि प्रति डॉलर 100 रुपये के आंकड़े को किसी मनोवैज्ञानिक दबाव की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। पनगढ़िया के अनुसार, 99 या 101 की तरह 100 भी केवल एक सामान्य संख्या है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कच्चे तेल की किल्लत चाहे थोड़े समय के लिए हो या लंबे समय के लिए, मौजूदा परिस्थितियों में रुपये के मूल्य को बाजार के अनुसार ही तय होने देना सबसे सही रणनीति होगी।
तेल संकट के दो पहलुओं पर विश्लेषण
अल्पकालिक संकट (3 महीने से 1 वर्ष): इस स्थिति में शुरुआत में रुपया कमजोर जरूर हो सकता है, लेकिन जैसे ही वैश्विक बाजार में तेल के दाम सामान्य होंगे, भारतीय मुद्रा फिर से मजबूती हासिल कर लेगी। इस बीच, रुपये की कमजोरी का फायदा उठाकर विदेशी निवेशक भारत की ओर आकर्षित हो सकते हैं और निवेश बढ़ा सकते हैं।
दीर्घकालिक संकट: यदि तेल का संकट लंबा खिंचता है, तो रुपये के मूल्य को घटने देना ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प बचता है। विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को बाजार में झोंककर रुपये को जबरन थामने की कोशिशें पूरी तरह बेअसर साबित होंगी और इसका कोई स्थाई लाभ नहीं मिलेगा।
अस्थाई उपायों से बचने की चेतावनी
पनगढ़िया ने स्पष्ट किया कि डॉलर बॉन्ड जारी करने या प्रवासी भारतीयों (NRIs) को अधिक ब्याज देकर विदेशी पूंजी जुटाने जैसे कदम केवल कुछ समय की राहत दे सकते हैं। लंबी अवधि में इन पर दिया जाने वाला भारी ब्याज देश के लिए फायदे से ज्यादा नुकसानदेह साबित होगा। उन्होंने वर्तमान आर्थिक स्थिति की तुलना 2013 के संकट से करने को भी गलत बताया। उनके मुताबिक, 2013 में महंगाई दर दहाई के आंकड़े (Double Digit) में थी, जबकि आज भारतीय अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है कि वह रुपये में होने वाली मामूली गिरावट से पैदा होने वाले दबाव को आसानी से झेल सकती है।
विदेशी मुद्रा बाजार का ताजा हाल
इस बीच, हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन (गुरुवार) को भारतीय रुपये में एक बार फिर रिकवरी देखने को मिली। अपने अब तक के सबसे निचले स्तर से उबरते हुए रुपये ने 50 पैसे की शानदार बढ़त दर्ज की और अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले 96.36 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 96.05 के उच्चतम और 96.60 के निचले स्तर तक गया। इससे ठीक एक दिन पहले (बुधवार) रुपया 96.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन भू-राजनीतिक मोर्चे पर तनाव कम होने और केंद्रीय बैंक की संभावित सक्रियता के चलते इसमें सुधार देखा गया।
बाजार विशेषज्ञों का क्या है मानना?
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तनाव में थोड़ी नरमी और केंद्रीय बैंक के रुख ने रुपये को सहारा दिया है।
दिलीप परमार (एचडीएफसी सिक्योरिटीज): उनका मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और मौद्रिक नीतियों पर टिकी रहेंगी। उनके अनुमान के मुताबिक रुपया फिलहाल 95.74 से 96.50 के दायरे में कारोबार कर सकता है।
अनुज चौधरी (मिराए एसेट शेयरखान): उन्होंने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और बाजार में केंद्रीय बैंक की मौजूदगी ने रुपये को टूटने से बचाया और उसे मजबूती दी।
















