मंत्रिपरिषद की बैठक में मंत्रालयों की रैंकिंग : लचर प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री सख्त, कैबिनेट में बड़े बदलाव के संकेत

नई दिल्ली (एजेंसी)। पांच देशों (यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली) की अपनी आधिकारिक यात्रा पूरी कर स्वदेश लौटते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं। दिल्ली में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिपरिषद की एक मैराथन बैठक आयोजित की गई, जिसने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य एजेंडा सरकार के मंत्रियों के कामकाज का बारीकी से मूल्यांकन करना था। एनडीए-3 सरकार के दो वर्ष पूरे होने की पूर्व संध्या पर हुए इस मिड-टर्म ऑडिट को मंत्रिमंडल में संभावित बड़े फेरबदल की भूमिका के रूप में देखा जा रहा है।
परफॉर्मेंस ऑडिट: कैसे तय हुई मंत्रालयों की रैंकिंग?
लगभग चार घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में महज औपचारिक बातचीत नहीं हुई, बल्कि सभी मंत्रालयों के काम का गहन विश्लेषण किया गया। बैठक के दौरान कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने मंत्रालयों के रिपोर्ट कार्ड और प्रशासनिक सुधारों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।
मंत्रालयों के प्रदर्शन को आंकने और उनकी रैंकिंग तय करने के लिए मुख्य रूप से दो कड़े पैमाने तय किए गए थे:
फाइलों का निपटारा: सरकारी कामकाज की गति क्या है और मंत्रालय किस तेजी के साथ फाइलों को आगे बढ़ा रहे हैं।
जनशिकायतों का निवारण (Public Grievances): आम जनता से जुड़ी समस्याओं और शिकायतों को दूर करने में मंत्रालयों की सक्रियता और संवेदनशीलता का स्तर क्या है।
इन्हीं मानकों के आधार पर सबसे बेहतरीन काम करने वाले ‘टॉप-5’ और सबसे लचर प्रदर्शन करने वाले ‘बॉटम-5’ मंत्रालयों की एक सूची तैयार कर बैठक में रखी गई। हालांकि, खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों के नामों को अभी आधिकारिक तौर पर गोपनीय रखा गया है, लेकिन इस रिपोर्ट कार्ड ने कई मंत्रियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
निचले पायदान वाले मंत्रियों को कड़ी हिदायत
जिन मंत्रालयों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और जो रैंकिंग में सबसे नीचे पाए गए, उन्हें प्रधानमंत्री ने कड़ा संदेश दिया है। सूत्रों के अनुसार, इन मंत्रियों को अपनी कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार लाने और आवश्यक कदम उठाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर निर्णयों में तेजी लाई जाए, उत्पादकता को बढ़ाया जाए और फाइलों की राह में आने वाली किसी भी प्रकार की लालफीताशाही (Bureaucratic delays) को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या होने जा रहा है केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल?
आगामी 9 जून को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस दूसरी वर्षगांठ से ठीक पहले सभी केंद्रीय मंत्रियों को राष्ट्रीय राजधानी में ही मौजूद रहने की हिदायत दी गई थी, जिससे सियासी अटकलें और तेज हो गई हैं।
बैठक में जिस तरह से मंत्रियों के काम का मूल्यांकन किया गया है, उससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री जल्द ही अपनी टीम का पुनर्गठन कर सकते हैं। माना जा रहा है कि खराब रिपोर्ट कार्ड वाले मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है या उनके विभागों में बदलाव किया जा सकता है। इसके विपरीत, बेहतर परिणाम देने वाले मंत्रियों और युवा चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘विकसित भारत 2047’ पर जोर
इस समीक्षा बैठक में कृषि, श्रम, सड़क परिवहन, कॉर्पोरेट मामले, विदेश, वाणिज्य और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विभागों ने पिछले दो सालों के कामकाज का ब्योरा पेश किया।
प्रधानमंत्री ने मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों को संबोधित करते हुए दो टूक कहा कि सरकार का उद्देश्य नागरिकों के जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि उनकी सहूलियत के लिए काम करना है।
उन्होंने ‘ईज ऑफ लिविंग’ (सहज जीवन) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हर प्रशासनिक सुधार और नई पहल का मूल उद्देश्य आम जनता की जिंदगी को आसान बनाना होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि ‘विकसित भारत 2047’ केवल एक संकल्प या नारा नहीं है, बल्कि देश के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और अंतिम लक्ष्य है।
















