वनांचल में उजाले की नई भोर : आजादी के बाद पहली बार चमका कटेमा गाँव

खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल में बसे कटेमा गाँव ने तरक्की की राह पर एक नया इतिहास रच दिया है। ‘पीएम-जगुआ योजना’ के तहत स्वतंत्रता के बाद पहली बार इस दुर्गम ग्रामीण इलाके को मुख्य बिजली ग्रिड से जोड़ा गया है। दशकों से अंधेरे का सामना कर रहे और ढिबरी व लालटेन की रोशनी पर निर्भर 27 परिवारों के घरों में जब बिजली का पहला बल्ब रोशन हुआ, तो पूरा गाँव जश्न के माहौल में डूब गया। ग्रामीणों के चेहरे की खुशी यह बताने के लिए काफी थी कि उनके लिए यह पल किसी बड़े त्योहार से कम नहीं है।
कैसे पहुँची गाँव तक बिजली?
इस कठिन भौगोलिक क्षेत्र तक बिजली पहुँचाने के लिए विद्युत विभाग ने कड़ी मशक्कत की है। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदम इस प्रकार हैं:
लंबी विद्युत लाइन: बेहद दुर्गम रास्तों से होते हुए लगभग 12 किलोमीटर लंबी 11 केवी (KV) बिजली लाइन बिछाई गई।
लो-टेंशन लाइन का विस्तार: गाँव के भीतर बिजली सप्लाई के लिए करीब 1 किलोमीटर लंबी निम्नदाब (LT) लाइन का जाल फैलाया गया।
पावर बैकअप: ग्रामीणों की बिजली संबंधी जरूरतों को बिना किसी बाधा के पूरा करने के लिए 63 केवीए (KVA) क्षमता का एक नया ट्रांसफार्मर भी लगाया गया है।
बदलाव की बयार: बिजली आने से अब कटेमा गाँव के बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य सेवाओं और रात के समय सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
गाँव के स्थानीय निवासियों ने जीवन को सुगम बनाने वाली इस बड़ी सौगात के लिए जिला प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों का दिल से आभार जताया है।
















