मध्य प्रदेश में जल संकट से निपटने की नई सरकारी रणनीति

भोपाल (एजेंसी)। पेयजल संकट को देखते हुए जल प्रदाय विभाग से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। अब केवल बेहद आपातकालीन स्थिति में ही अवकाश मिल सकेगा।
- कलेक्टर्स को कमान और कंट्रोल रूम की स्थापना
मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने रविवार को सभी कलेक्टर्स और संबंधित विभागों (पीएचई, नगरीय निकाय, जल निगम, पंचायत) के साथ आपातकालीन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं कि:
वे स्वयं सेंट्रल कंट्रोल रूम की निगरानी करें।
पेयजल की उपलब्धता की रोजाना समीक्षा की जाए।
जनप्रतिनिधियों के साथ तालमेल बिठाकर प्रभावित इलाकों में पानी पहुंचाया जाए।
सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गारंटी के तहत आने वाली पानी की शिकायतों का निपटारा तय समय सीमा के भीतर हो।
- पानी के टैंकरों की सख्त निगरानी
जल परिवहन (वाटर सप्लाई) में लगे टैंकरों की मॉनिटरिंग बेहद सख्त की जाएगी ताकि पानी का दुरुपयोग या कालाबाजारी न हो। कलेक्टर्स को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि टैंकर हर हाल में चिन्हित बसाहटों तक पहुंचे।
- बिजली कटौती पर रोक और भारी बजटीय आवंटन
पेयजल व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे, इसके लिए ऊर्जा विभाग को भी इस मास्टर प्लान में जोड़ा गया है। मुख्य सचिव ने साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी नलजल योजना का बिजली कनेक्शन नहीं कटना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, सरकार ने वित्तीय सहायता भी जारी की है:
₹1500 करोड़: ग्रामीण इलाकों में नए बोरवेल और खनन कार्यों के लिए।
₹55 करोड़: पंचायतों को जल प्रदाय व्यवस्था के रखरखाव (संधारण) के लिए।
- पंचायतों को मिले नए अधिकार
नई एसओपी (SOP) और संसोधित एसओआर (SOR) के तहत अब ₹10,000 तक के जल संधारण कार्य पंचायतें अपने स्तर पर खुद करा सकेंगी। इसके लिए वे 15वें-16वें वित्त आयोग की राशि, सरकारी अनुदान या अपनी खुद की आय का इस्तेमाल कर सकती हैं।
- आगामी अभियान: गंगा दशहरा और जल संवर्धन
अपर मुख्य सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि 25 और 26 मई को प्रदेश में गंगा दशहरा के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें मुख्यमंत्री स्वयं उज्जैन में शामिल होंगे। कलेक्टर्स से कहा गया है कि इन धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों को जल संरक्षण और जनोपयोगी कार्यों से जोड़ा जाए।
















