औपनिवेशिक मानसिकता छोड़ जनता की सच्ची मददगार बने पुलिस : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

गंगटोक (एजेंसी)। सिक्किम में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान सिक्किम पुलिस को प्रतिष्ठित ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ (Police Color) सम्मान से नवाजा गया। इस गरिमामयी अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुरक्षा बलों को संबोधित करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस को समाज में केवल एक नियंत्रणकारी बल के रूप में नहीं, बल्कि नागरिकों के सच्चे मार्गदर्शक और सहयोगी के रूप में अपनी पहचान बनानी होगी। जब पुलिस और आम जनता के बीच का फासला कम होगा, तभी समाज में सुरक्षा का माहौल और मजबूत होगा।
गुलामी के दौर की सोच को पूरी तरह बदलना जरूरी
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने पुलिस व्यवस्था के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय पुलिस का ढांचा लंबे समय तक ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के प्रभाव में रहा, जहाँ पुलिस का मुख्य काम जनता की सेवा करना नहीं बल्कि उन पर नियंत्रण रखना था।
“हमें इस पुरानी औपनिवेशिक मानसिकता को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा। जब देश के नागरिक खुद को सुरक्षित और सशक्त महसूस करेंगे, तभी वे ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने में अपना शत-प्रतिशत योगदान दे सकेंगे।”
पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही पर जोर
राष्ट्रपति मुर्मु ने पुलिस प्रणाली को अधिक आधुनिक और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए कुछ प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया:
भयमुक्त वातावरण: पुलिस थानों और कार्यप्रणाली को ऐसा स्वरूप दिया जाए जहाँ कोई भी साधारण नागरिक बिना किसी डर या संकोच के अपनी शिकायत दर्ज करा सके।
विशेष संवेदनशीलता: समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस का रवैया अत्यधिक संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए।
अपराध नियंत्रण से आगे की सोच: पुलिस की जिम्मेदारी केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक जागरूक, सुरक्षित और कानून का सम्मान करने वाले समाज का निर्माण करना भी उनका मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।
अंत में, राष्ट्रपति ने वर्ष 1897 में स्थापित सिक्किम पुलिस के गौरवशाली इतिहास की सराहना की। उन्होंने राज्य में शांति, कानून व्यवस्था और आपसी सद्भाव बनाए रखने के लिए सिक्किम पुलिस के निरंतर प्रयासों को बधाई दी।
















