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अमेरिका-ईरान शांति समझौता : $300 अरब के पैकेज पर घमासान, ट्रंप ने दावों को बताया भ्रामक

नई दिल्ली (एजेंसी)। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए एक संभावित शांति समझौते का खाका (ड्राफ्ट) तैयार किया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 300 अरब डॉलर बताई जा रही है। इस शुरुआती समझौते के तहत ईरान ने जंग खत्म करने के बदले आर्थिक गारंटी पैकेज, आर्थिक प्रतिबंधों से मुक्ति और विदेशी बैंकों में फ्रीज (जब्त) पड़ी अपनी संपत्तियों को बहाल करने की शर्त रखी है।

इस साल 28 फरवरी से शुरू हुए दोनों देशों के बीच के इस टकराव ने वैश्विक तेल बाजार और कच्चे तेल की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे में यह समझौता एक बड़े आर्थिक और राजनीतिक समाधान की तरह देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी बताते हुए दावा किया है कि ईरान के साथ डील लगभग पूरी हो चुकी है। ट्रंप के अनुसार, इस समझौते से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी और व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) को फिर से सामान्य जहाजों के लिए खोला जा सकेगा।

एक ही पैकेज पर अलग-अलग सोच

इस भारी-भरकम राशि को लेकर दोनों देशों का नजरिया पूरी तरह अलग है:

ईरान का पक्ष: ईरानी मीडिया और अधिकारियों का कहना है कि यह 300 अरब डॉलर का पैकेज कोई मदद नहीं, बल्कि युद्ध से हुए नुकसान का ‘मुआवजा’ है। ईरान ने साफ किया है कि जब तक ठोस आर्थिक राहत और गारंटी नहीं मिलती, तब तक कोई भी शांति समझौता लंबे समय तक नहीं टिकेगा।

अमेरिका का पक्ष: अमेरिकी प्रशासन और न्यूयॉर्क टाइम्स जैसी पश्चिमी मीडिया इसे ‘अंतरराष्ट्रीय निवेश फंड’ या ‘पुनर्निर्माण योजना’ के तौर पर पेश कर रही है, जिसमें निजी क्षेत्र की कंपनियां निवेश करेंगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस 300 अरब डॉलर की फंडिंग की खबरों को विपक्षी डेमोक्रेट्स द्वारा फैलाई गई ‘फेक न्यूज’ और भ्रामक करार दिया है। ट्रंप का कहना है कि ईरान इस बात पर राजी हो गया है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, लेकिन अमेरिका द्वारा इतने बड़े फंड का भुगतान किए जाने की बात गलत है।

ईरान की प्रमुख शर्तें

ईरानी समाचार एजेंसी ‘मेहर’ के मुताबिक, उनके वार्ताकारों ने समझौते के लिए कुछ बेहद कड़े नियम सामने रखे हैं:

अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का एक व्यापक पुनर्निर्माण ढांचा तैयार करें।

60 दिनों की बातचीत के दौरान ईरान की जब्त पड़ी 24 अरब डॉलर की संपत्ति को तुरंत रिलीज किया जाए, जिसमें से आधी रकम फौरन दी जाए।

ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने पर लगी पाबंदियां पूरी तरह हटाई जाएं।

इस शुरुआती मसौदे पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने की संभावना है।

चुनौतियां और अनिश्चितता: लंदन के मीडिया नेटवर्क ‘ईरान इंटरनेशनल’ के अनुसार, इस समझौते की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है और अमेरिकी प्रशासन ने खुलकर 300 अरब डॉलर के आंकड़े को स्वीकार नहीं किया है। इसके अलावा, ईरान के भीतर के कट्टरपंथी दल और इजरायल जैसे देश इस समझौते का विरोध कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक शुरुआती बातचीत का ढांचा है, कोई अंतिम फैसला नहीं। जब तक पैसों के लेनदेन और प्रतिबंधों को हटाने को लेकर चीजें पूरी तरह साफ नहीं हो जातीं, तब तक इस शांति समझौते के भविष्य पर सवालिया निशान बने रहेंगे।

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