बिलासपुर नगर निगम में बड़ा घूसकांड : तत्कालीन महापौर पर 1.15 करोड़ रुपये लेने का आरोप

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर नगर निगम से भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। नगर निगम के तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन ने तत्कालीन महापौर रामशरण यादव पर नियमों को दरकिनार कर एक टेंडर स्वीकृत कराने के बदले 1 करोड़ 15 लाख रुपये की रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है।
कैसे खुली भ्रष्टाचार की पोल?
यह पूरा मामला तब पेचीदा हो गया जब इस सौदेबाजी में खुद शामिल संपदा अधिकारी ने इसकी परतें खोलीं। खबरों के मुताबिक:
बिचौलिए की भूमिका: राजेश देवांगन ने ‘गणेश ट्रेडर्स’ को टेंडर दिलवाने के लिए महापौर के करीबी मुकेश पाठक के जरिए डील तय की थी। आरोप है कि इसी माध्यम से रिश्वत की भारी-भरकम राशि तत्कालीन महापौर तक पहुंचाई गई।
कलेक्टर की कार्रवाई से बिगड़ा खेल: सब कुछ तय योजना के अनुसार चल रहा था, लेकिन तत्कालीन कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने इस संदिग्ध टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
पैसे वापसी का दबाव: टेंडर रद्द होते ही ‘गणेश ट्रेडर्स’ के मालिकों ने अपने 1.15 करोड़ रुपये वापस करने का दबाव संपदा अधिकारी देवांगन पर बनाना शुरू कर दिया।
मामला पहुंचा पुलिस के पास
रकम की वापसी को लेकर आपसी विवाद इतना बढ़ गया कि बात पुलिस स्टेशन तक जा पहुंची। इस बीच सोशल मीडिया पर राजेश देवांगन का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वह इस अवैध लेनदेन को स्वीकार करते दिख रहे हैं।
विवादों में घिरने के बाद तत्कालीन संपदा अधिकारी ने अब इस पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक (SP) से की है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस क्या कदम उठाती है।
















