सुकमा के मड़कम देवा ने मीठे पानी में बोई समृद्धि : सरकारी सहयोग से झींगा पालन में रचा नया इतिहास

सुकमा। पारंपरिक खेती की सीमाओं को लांघकर अगर सही दिशा में कदम बढ़ाए जाएं, तो सफलता की एक नई इबारत लिखी जा सकती है। इसे सच कर दिखाया है छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के दुब्बाटोटा गांव के रहने वाले किसान मड़कम देवा ने। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा कृषि के सहयोगी क्षेत्रों जैसे मत्स्य पालन को दिए जा रहे बढ़ावा का लाभ उठाकर मड़कम देवा आज क्षेत्र के युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता की एक मिसाल बन चुके हैं।
ऐसे शुरू हुआ बदलाव का सफर
मड़कम देवा की इस कामयाबी के पीछे दृढ़ संकल्प और सरकारी योजनाओं का बेहतरीन समन्वय है। मत्स्य पालन विभाग से उन्हें तालाब निर्माण के लिए ₹7.20 लाख का ऋण मिला, जिसमें ₹4.20 लाख की बड़ी अनुदान राशि शामिल थी। इसके साथ ही, क्रेड़ा (CREDA) विभाग की मदद से रियायती दरों पर मिले सोलर पंप ने तालाब के लिए चौबीसों घंटे पानी की व्यवस्था को बेहद आसान बना दिया।
वैज्ञानिक तरीकों से मिला बंपर उत्पादन
केवल बुनियादी ढांचा ही नहीं, बल्कि मड़कम ने आधुनिक तकनीकों को भी अपनाया। कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से वैज्ञानिक मत्स्य पालन का बाकायदा प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने काम शुरू किया। इस वैज्ञानिक दृष्टिकोण का सुखद परिणाम यह रहा कि चालू वर्ष के जून माह में उन्होंने:
लगभग 2.50 क्विंटल झींगा का उत्पादन किया।
करीब 15 क्विंटल मछली बाजार में उतारी।
इस पूरे उत्पादन से उन्होंने लगभग ₹5 लाख की शानदार आय अर्जित की।
उनके तालाब के झींगों और मछलियों की गुणवत्ता इतनी बेहतरीन है कि स्थानीय बाजारों के अलावा दूर-दराज के खरीदार भी सीधे दुब्बाटोटा गांव पहुंच रहे हैं।
राजधानी में मिला सम्मान और बढ़ी प्रेरणा
मड़कम देवा के इस नवाचार और कड़ी मेहनत को राज्य स्तर पर भी सराहना मिली। विश्व पशु चिकित्सा दिवस के मौके पर रायपुर में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने उन्हें सम्मानित किया।
“सुकमा जिले में मीठे पानी के भीतर झींगा पालन की असीम संभावनाएं छिपी हुई हैं। मड़कम देवा की सफलता आज के युवाओं और पारंपरिक कृषकों को यह संदेश देती है कि कम लागत और सीमित भूमि में भी बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है।”
— अमित कुमार, कलेक्टर (सुकमा)
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा
यह सफलता कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कैसे सही मार्गदर्शन, तकनीक और कल्याणकारी सरकारी योजनाएं मिलकर ग्रामीण परिवेश में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती हैं। मड़कम देवा की यह पहल न केवल उनके परिवार को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर रही है, बल्कि सुकमा के अन्य किसानों को भी लीक से हटकर कुछ नया करने की प्रेरणा दे रही है।
















