छत्तीसगढ़

पंडवानी की सशक्त आवाज डॉ. तीजन बाई का अवसान, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जताया गहरा शोक

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को सात समंदर पार तक पहुंचाने वाली मशहूर पंडवानी गायिका, पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के देहावसान पर राज्य के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने इस क्षति को अपूरणीय बताते हुए कहा कि डॉ. तीजन बाई के जाने से छत्तीसगढ़ की कला जगत का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है।

उप मुख्यमंत्री साव ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा: “यह खबर बेहद हृदयविदारक है। डॉ. तीजन बाई ने अपनी कला के दम पर छत्तीसगढ़ की अनूठी संस्कृति को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दी थी। सच कहें तो पंडवानी और डॉ. तीजन बाई एक-दूसरे का पर्याय बन चुके थे। उनके हाथों में सजने वाले तंबूरे की थाप और उनकी बुलंद आवाज हमेशा करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में जीवंत रहेगी।”

कला और अभिनय का बेजोड़ संगम

श्री साव ने तीजन बाई की कलात्मक शैली को याद करते हुए कहा कि उनकी प्रस्तुति देने का अंदाज बेहद जादुई था। जब वह हाथ में तंबूरा लेकर खड़ी होती थीं, तो अपनी कड़कती आवाज, कमाल के अभिनय और शानदार लय से पूरे माहौल को महाभारत के कालखंड में ले जाती थीं। उनके संगीत साथियों की जुगलबंदी और उनकी कथावाचन शैली अमिट थी, जिसने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोगों को सम्मोहित किया। आज भी प्रदेश के गांवों में उनकी गाई पंडवानी बड़े चाव से सुनी जाती है।

उप मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की और कहा कि भगवान उनके शोक संतप्त परिवार और देश-दुनिया में फैले उनके करोड़ों प्रशंसकों को इस असीम दुख को सहने का संबल प्रदान करें।

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