छत्तीसगढ़

साय सरकार की योजनाओं से संवरा आदिवासी परिवार : सरिता बैगा को मिला पक्का मकान और हर महीने आर्थिक मदद

रायपुर। सरकारी योजनाओं का असली मकसद तब पूरा होता है जब वे समाज के सबसे आखिरी व्यक्ति के जीवन को बदल देती हैं। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले से ऐसी ही एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। यहाँ के गौरेला विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंडरीपानी की रहने वाली सरिता बैगा के जीवन में ‘पीएम जनमन आवास योजना’ और ‘महतारी वंदन योजना’ के संगम से बड़ा बदलाव आया है। अब उनका आदिवासी परिवार एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहा है।

टूटे खपरैल के डर से मिली मुक्ति

कुछ समय पहले तक सरिता बैगा का परिवार एक मिट्टी के कच्चे मकान में रहने को मजबूर था। जैसे ही मॉनसून की शुरुआत होती थी, पूरे परिवार की रातें जागकर कटती थीं। खपरैल की छत से पानी टपकना और दीवारों का सील जाना आम बात थी। हर साल छत की मरम्मत और खपरैल बदलने में अच्छी-खासी रकम खर्च हो जाती थी, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ बना रहता था। छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी हमेशा डर बना रहता था।

सरकारी प्रयास से साकार हुआ पक्के घर का सपना

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में चल रहे विशेष अभियानों के तहत सरिता बैगा को ‘पीएम जनमन आवास योजना’ का लाभ मिला। स्थानीय ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के आपसी तालमेल से उन्हें समय पर पक्का मकान स्वीकृत हुआ। आज उनका परिवार एक मजबूत और आधुनिक सुविधाओं से लैस घर में शिफ्ट हो चुका है।

इस नए आशियाने ने न सिर्फ उनकी रहने की जगह बदली है, बल्कि पूरे परिवार का हौसला भी बढ़ाया है। अब बारिश का मौसम उनके लिए आफत नहीं, बल्कि सुकून लेकर आता है, जहाँ बच्चे बिना किसी डर के अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे पा रहे हैं।

आर्थिक सहारा बनी ‘महतारी वंदन योजना’

मकान के साथ-साथ सरिता को छत्तीसगढ़ सरकार की ‘महतारी वंदन योजना’ के जरिए हर महीने मिलने वाली वित्तीय सहायता भी नियमित रूप से मिल रही है। इस राशि का उपयोग वे घर के रोजमर्रा के खर्चों और बच्चों की जरूरतों को पूरा करने में कर रही हैं। इससे परिवार की आर्थिक तंगी दूर हुई है और वे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।

अपनी खुशी जाहिर करते हुए सरिता बैगा कहती हैं, “मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि हमारा भी कभी पक्का घर होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और सरकार की नीतियों ने हमारे सपनों को सच कर दिया है।”

विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों (PVTGs) के विकास के लिए चलाई जा रही इस योजना का पारदर्शी क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में बेहद मददगार साबित हो रहा है।

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