पंडवानी साम्राज्ञी पद्म विभूषण तीजन बाई पंचतत्व में विलीन, राजकीय सम्मान के साथ पैतृक गांव में हुआ अंतिम संस्कार

रायपुर। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक पटल पर स्थापित करने वाली महान पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई का रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। राज्य सरकार की घोषणा के बाद प्रशासनिक अफसरों, राजनेताओं, कलाकारों, साहित्यकारों और हजारों प्रशंसकों ने नम आंखों से लोक कला की इस महान साधिका को अंतिम विदाई दी। उनके निधन से पूरे देश के कला जगत में शोक की लहर है।
संघर्ष से शिखर तक का सफर
एक साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक का सफर तय करने वाली तीजन बाई का जीवन कड़े संघर्ष, अटूट साधना और समर्पण की मिसाल था। तमाम सामाजिक और आर्थिक बाधाओं को पार करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को एक नई ऊंचाई दी। महाभारत के प्रसंगों को अपनी ओजपूर्ण शैली, जीवंत अभिनय और बुलंद आवाज में पिरोकर उन्होंने देश-विदेश के करोड़ों दर्शकों को भारतीय संस्कृति से रूबरू कराया।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजी गईं
भारतीय लोक कला में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पदम विभूषण के साथ-साथ पद्मभूषण और पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। वे वैश्विक मंच पर भारतीय लोक परंपरा का चेहरा थीं, जिन्होंने अपनी कला से देश का मान बढ़ाया।
एक स्वर्णिम युग का अंत
गनियारी गांव में अंतिम विदाई के दौरान उपस्थित जनसैलाब ने उनकी सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने का संकल्प लिया। डॉ. तीजन बाई का जाना भारतीय लोक कला के एक स्वर्णिम युग के अंत जैसा है, लेकिन उनका ओजस्वी व्यक्तित्व, जीवंत कला और पंडवानी की समृद्ध परंपरा आने वाली पीढ़ियों का हमेशा मार्गदर्शन करती रहेगी।
















