पी एम आवास योजना ने बदली सुखदेव की किस्मत : कच्चे मकान की दिक्कतों से मिली स्थाई मुक्ति, अब पक्के आशियाने में सुकून

रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) समाज के जरूरतमंद तबके को न सिर्फ सिर छुपाने की छत दे रही है, बल्कि उन्हें एक गरिमामयी और सुरक्षित जीवन भी प्रदान कर रही है। छत्तीसगढ़ के अंदरूनी ग्रामीण इलाकों में रहने वाले अनगिनत परिवारों के लिए यह योजना वरदान साबित हो रही है। ऐसा ही एक सकारात्मक बदलाव मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मानपुर विकासखंड (ग्राम पंचायत मरकेली) में रहने वाले सुखदेव निषाद के जीवन में आया है।
सालों झेलीं बरसात की मुश्किलें
खेती-किसानी के जरिए जैसे-तैसे अपने परिवार का गुजारा करने वाले सुखदेव निषाद लंबे समय से एक जर्जर, खपरैल वाले कच्चे मकान में रहने को मजबूर थे। सीमित आमदनी के कारण नया घर बनाना उनके बूते से बाहर था। हर साल मानसून आते ही उनकी परेशानियां बढ़ जाती थीं। मुख्य सड़क के पास स्थित होने के कारण बारिश का पानी सीधे उनके घर में घुस जाता था, जिसके चलते पूरे परिवार को जागकर रातें काटनी पड़ती थीं और पानी बाहर निकालना पड़ता था। हमेशा दीवारें गिरने का खतरा मंडराता रहता था।
बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ता था असर
सुखदेव की पत्नी जानकी बाई ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि आर्थिक तंगी की वजह से पक्का मकान सिर्फ एक कल्पना जैसा था। बरसात के मौसम में उनकी बेटी नंदिनी की पढ़ाई का बहुत नुकसान होता था, क्योंकि घर में पानी भर जाने से कई बार उसकी किताबें और घर का राशन तक गीला हो जाता था। पूरा परिवार हमेशा एक अनजाने डर के साए में जीता था।
योजना से मिला नया हौसला और सुरक्षित भविष्य
सुखदेव निषाद की किस्मत तब बदली जब वर्ष 2024-25 में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान की स्वीकृति मिली। सरकारी मदद से आज उनका स्वयं का एक मजबूत घर बनकर तैयार हो चुका है। अब भारी बारिश में भी परिवार को जागना नहीं पड़ता, बल्कि वे चैन की नींद सोते हैं। बेटी नंदिनी भी बिना किसी रुकावट के अपनी पढ़ाई पूरी कर पा रही है।
सुखदेव और उनके परिवार का कहना है कि यह नया आशियाना सिर्फ ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं है, बल्कि उनकी आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की नई पहचान है। उन्होंने इस सुखद बदलाव के लिए प्रशासन और सरकार का सहृदय आभार व्यक्त किया है।
















