आर्थिक संकट की कगार पर फ्रांस : विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, सुधार न होने पर GDP के दोगुने से अधिक हो सकता है कर्ज

नई दिल्ली (एजेंसी)। वैश्विक स्तर पर सरकारी कर्ज का संकट केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं भी इसकी चपेट में आती दिख रही हैं। अर्थशास्त्रियों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों ने फ्रांस की डगमगाती वित्तीय स्थिति को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि फ्रांस ने जल्द ही कड़े राजकोषीय और संरचनात्मक सुधार नहीं किए, तो उसका बढ़ता हुआ राष्ट्रीय कर्ज अर्थव्यवस्था के लिए एक लाइलाज बीमारी बन जाएगा।
GDP का 117.5% हुआ कर्ज, मंडरा रहा है ‘स्नोबॉल इफेक्ट’ का साया
चालू वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, फ्रांस पर कुल सार्वजनिक कर्ज 3.5 ट्रिलियन यूरो (लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर) के पार चला गया है। यह आंकड़ा देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 117.5 प्रतिशत है। राजनीतिक अनिश्चितता और सुस्त नीतिगत फैसलों ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
वित्तीय विश्लेषकों ने फ्रांस को ‘स्नोबॉल इफेक्ट’ (Snowball Effect) के प्रति सचेत किया है। इसका मतलब है कि जब सरकार द्वारा लिए गए कर्ज का ब्याज देश की आर्थिक विकास दर (Growth Rate) को पार कर जाता है, तो कर्ज का ग्राफ खुद-ब-खुद तेजी से ऊपर भागने लगता है। यदि सरकार अपने प्राथमिक बजट में बचत (Surplus) नहीं बढ़ा पाती, तो यह संकट समय के साथ एक विशाल वित्तीय चक्रवात का रूप ले लेता है।
साल 2050 तक की डरावनी तस्वीर
203% तक पहुंच सकता है कर्ज: OECD के महासचिव मैथियास कोरमैन के अनुसार, मौजूदा नीतियां जारी रहीं तो 2050 तक फ्रांस का कर्ज उसकी GDP का 203% हो जाएगा।
ब्याज का भारी बोझ: साल 2029 तक फ्रांस को केवल अपने कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए हर साल 100 अरब यूरो खर्च करने पड़ सकते हैं।
महामारी के बाद भी लापरवाही: ‘कोर्ट डेस कॉम्प्टेस’ की रिपोर्ट बताती है कि यूरोजोन में फ्रांस अकेला ऐसा देश है, जिसने कोविड-19 महामारी के बीत जाने के बाद भी अपने कर्ज को कम करने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया।
शिक्षा और रक्षा बजट से भी बड़ा हुआ ब्याज का खर्च
साल 2025 में फ्रांस ने कर्ज के ब्याज के तौर पर 66 अरब यूरो का भुगतान किया, जो देश के शिक्षा और रक्षा जैसे संवेदनशील विभागों के बजट से भी कहीं ज्यादा है।
“यदि तुरंत सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो फ्रांस ब्याज के इस दलदल में ऐसा फंसेगा कि उसे बाहर निकलने में दशकों लग जाएंगे। इटली इसका जीता-जागता उदाहरण है, जो बजट सरप्लस बनाए रखने के बावजूद आज दुनिया के सबसे कर्जदार विकसित देशों में से एक है।”
— कैरिन कैम्बी, वरिष्ठ अधिकारी, कोर्ट डेस कॉम्प्टेस
रेटिंग एजेंसियों ने दी दूरी बनाने की सलाह
ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) का कहना है कि फ्रांस में कर्ज के मुकाबले ब्याज बढ़ने की रफ्तार सबसे तेज रहने वाली है। वहीं, दिग्गज इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) ने इस वित्तीय जोखिम को देखते हुए अपने निवेशकों को फ्रांसीसी सरकारी बॉन्ड और कर्ज में निवेश घटाने की सलाह दी है।
2027 के राष्ट्रपति चुनाव का मुख्य एजेंडा
फ्रांस में आगामी राष्ट्रपति चुनाव से पहले यह आर्थिक संकट एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। एडुआर्ड फिलिप और गैब्रियल अट्टल जैसे प्रमुख सेंट्रिस्ट नेता इस मुद्दे को भुनाने में लगे हैं। वहीं फ्रांसीसी सांसद केविन मौविएक्स का कहना है कि देश के आर्थिक हालात बेहद चिंताजनक हैं और सुधारों में जितनी देरी होगी, आम जनता को इसके उतने ही गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
















