छत्तीसगढ़

डिजिटल सुशासन से बदल रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में प्रशासनिक सुधारों का नया दौर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रशासनिक व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं में व्यापक स्तर पर बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार पारंपरिक कार्यप्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाकर आम नागरिकों को अधिक सशक्त और समृद्ध बनाने की दिशा में काम कर रही है। अब तक लागू किए गए 435 से अधिक प्रशासनिक सुधारों का मुख्य उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और समाज के अंतिम व्यक्ति तक तकनीक के माध्यम से सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री का कहना है कि सुशासन केवल नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार की मूल कार्यशैली बन चुका है। विकसित भारत-2047 के संकल्प को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में ई-गवर्नेंस, डिजिटल कृषि, पारदर्शी राजस्व प्रशासन और त्वरित शिकायत निवारण जैसी प्रणालियों को सुदृढ़ किया जा रहा है।

प्रमुख क्षेत्रों में किए गए डिजिटल और प्रशासनिक सुधार:

सशक्त डिजिटल गवर्नेंस: सुशासन एवं अभिसरण विभाग के तहत ‘अटल मॉनिटरिंग पोर्टल’ के जरिए सरकारी योजनाओं की ऑनलाइन समीक्षा की जा रही है। इसके साथ ही ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री कार्यालय पोर्टल और ‘स्वागतम पोर्टल’ जैसी पहलों ने फाइलों के निपटारे की गति को तेज और जवाबदेह बनाया है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076): नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए चौबीसों घंटे कार्यरत हेल्पलाइन सेवा संचालित है। इसमें 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हुए हैं, जहां दर्ज शिकायतों की ऑनलाइन ट्रैकिंग की जा सकती है। असंतोषजनक समाधान की स्थिति में मामला स्वतः उच्च अधिकारियों तक पहुंच जाता है।

‘सेवा सेतु’ एकीकृत मंच: इस सिंगल डिजिटल पोर्टल पर 36 विभागों की 520 सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। राज्य भर में सक्रिय हजारों सेवा केंद्रों के माध्यम से लाखों आवेदनों का रिकॉर्ड 94.3% की सफलता दर के साथ निपटारा किया गया है। इसमें डिजिलॉकर एकीकरण, ई-चालान और सुरक्षित ऑनलाइन भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।

निवेश अनुकूल माहौल: औद्योगिक प्रगति के लिए ‘सिंगल विंडो सिस्टम 2.0’ लागू किया गया है। इसके अलावा, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए दुकानों को 24 घंटे खोलने की अनुमति दी गई है और एमएसएमई (MSME) मंत्रालय के गठन की घोषणा की गई है।

रजिस्ट्री व्यवस्था में सुगमता: संपत्ति के पंजीकरण को आसान बनाने के लिए ‘सुगम’ ऐप और डिजिटल नकल की सुविधा शुरू की गई है। इसके अलावा, अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाले 0.60% उपकर को हटाकर जनता को बड़ी राहत दी गई है। नवा रायपुर में देश का पहला अत्याधुनिक स्मार्ट पंजीयन कार्यालय स्थापित किया गया है, जहां चंद मिनटों में रजिस्ट्री का काम पूरा हो जाता है।

भूमि प्रबंधन और ड्रोन तकनीक: ‘डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम’ के तहत राजस्व न्यायालयों का डिजिटलीकरण और जियो-रेफ्रेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक की मदद से ‘स्वामित्व योजना’ के तहत डिजिटल संपत्ति कार्ड बांटे जा रहे हैं। भूमि सुधारों में बेहतर प्रदर्शन के लिए केंद्र सरकार की ओर से राज्य को विशेष सहायता अनुदान भी प्राप्त हुआ है।

छत्तीसगढ़ सरकार की ये तकनीक-सक्षम नीतियां न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ा रही हैं, बल्कि सरकार और जनता के बीच के भरोसे को मजबूत करते हुए राज्य को देश के अग्रणी डिजिटल प्रदेशों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर रही हैं।

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