छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में आदिवासियों का सर्वांगीण विकास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय के जनदर्शन हॉल में आयोजित ‘भारतीय आदिम जाति सेवक संघ’ के नवनियुक्त प्रांतीय बोर्ड के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने नए पदाधिकारियों को बधाई देते हुए स्पष्ट किया कि सूबे की सरकार आदिवासियों के हक, हकूक और उनके चहुंमुखी विकास के लिए पूरी ईमानदारी से काम कर रही है, जिससे राज्य में जनजातीय उत्थान को एक नई रफ्तार मिली है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नवगठित बोर्ड आदिवासी समाज के कल्याण, उनके अधिकारों के संरक्षण और सामाजिक उत्थान की दिशा में एक सेतु का काम करेगा। इस गरिमामयी समारोह में संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश कुमार उइके, श्रीमती कौशल्या साय, राजेश मालवीय, कुंवर जितेंद्र नरसिंह राणा सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित थे।

ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की जरूरत

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की भौगोलिक और सांस्कृतिक संरचना का जिक्र करते हुए कहा:

“छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बहुल राज्य है। यहाँ कई विशेष पिछड़ी जनजातियाँ अपनी अनूठी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं के साथ सदियों से निवास कर रही हैं। ऐसे में राज्य बोर्ड का गठन यहाँ के लोगों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।”

उन्होंने संस्था के सुनहरे इतिहास को याद करते हुए बताया कि देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद इस संस्था के प्रथम अध्यक्ष थे, और पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने भी इसका नेतृत्व किया था, जो इस संघ की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है।

बस्तर में बदलाव की नई बयार: ‘नियद नेल्लानार’ और ‘बस्तर मुन्ने’ का असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप बस्तर सहित तमाम आदिवासी अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। बुनियादी सुविधाओं जैसे- सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का सुदूर वनों तक तेजी से विस्तार किया जा रहा है।

इस बदलाव को रेखांकित करने वाले कुछ प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

ऐतिहासिक सर्वे: पिछले 40 वर्षों से उपेक्षित रहे बस्तर के करीब 400 गांवों का अब प्रशासनिक स्तर पर सर्वे पूरा कर लिया गया है, जिससे वहां विकास कार्यों को गति मिल रही है।

नियद नेल्लानार योजना: इस योजना के जरिए नक्सल प्रभावित व संवेदनशील क्षेत्रों के 500 से अधिक गांवों तक मूलभूत सुविधाएं, राशन दुकानें और कल्याणकारी योजनाएं पहुंचाई जा रही हैं।

घर-घर स्वास्थ्य सेवाएं: ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना’ के तहत बस्तर के अंतिम छोर पर रहने वाले ग्रामीणों की मुफ्त सेहत जांच और इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

बस्तर मुन्ने (अग्रणी बस्तर): इस विशेष पहल के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और प्रभावी तरीके से वनांचल के लोगों तक पहुँचाया जा रहा है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि बस्तर की समृद्ध जनजातीय कला-संस्कृति और नैसर्गिक खूबसूरती अब वैश्विक स्तर पर पर्यटकों को लुभा रही है। स्थानीय स्तर पर होमस्टे की शुरुआत से न केवल पर्यटकों को बस्तर की संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिल रहा है, बल्कि इससे स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बड़ी मजबूती मिल रही है।

अंत में, उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय आदिम जाति सेवक संघ का यह नया बोर्ड छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजते हुए उन्हें आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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