छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता व लघु वनोपज विपणन को गति देने की तैयारी, IDC बैठक में अहम फैसले

रायपुर। राज्य में तेंदूपत्ता और अन्य वनोपजों के व्यापार व विपणन व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए शासन स्तर पर मंथन तेज हो गया है। नया रायपुर स्थित मंत्री निवास पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में ‘वनोपज राजकीय व्यापार अंतर्विभागीय समिति’ (आईडीसी) की 321वीं बैठक संपन्न हुई।
इस दौरान वर्ष 2026 के संग्रहित व गोदामों में रखे तेंदूपत्तों के द्वितीय चरण के विक्रय तथा वर्ष 2025 सीजन के उन तेंदूपत्ता लॉट के फिर से विक्रय पर चर्चा की गई, जिनके क्रेता करारनामा समाप्त हो चुके थे। इसके अतिरिक्त, 4 अगस्त 2026 को बुलाई गई निविदाओं में प्राप्त दरों के अनुमोदन संबंधी प्रस्तावों पर भी समीक्षा की गई।
बैठक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
पारदर्शिता और त्वरित विक्रय: वन मंत्री ने निर्देश दिए कि संग्रहणकर्ताओं के लाभ को सर्वोपरि रखते हुए तेंदूपत्ता और अन्य वनोपजों की बिक्री प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और नियमानुसार समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।
संग्राहकों के आर्थिक हित: वनांचल में रहने वाले परिवारों और ग्रामीणों की आजीविका सुधारने के लिए संग्रहण मूल्य, विपणन ढांचे और पारिश्रमिक भुगतान की प्रणाली को और मजबूत किया जा रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार लघु वनोपज आधारित गतिविधियों, प्रसंस्करण और बेहतर मार्केटिंग के माध्यम से वनवासियों को रोजगार व आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने के प्रयास में जुटी है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुवा, वन बल प्रमुख श्री अरूण कुमार पाण्डेय, सचिव श्री अमरनाथ, मुख्य वन संरक्षक श्री कोशलेन्द्र कुमार, मुख्य वनसंरक्षक श्रीमती संजीता गुप्ता, तथा कार्यकारी निदेशक वन श्री एस. वेंकटचलम् सहित अन्य विभागीय उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।
















