बाल झड़ने की असली वजह : क्या सिर्फ कैल्शियम की कमी है जिम्मेदार या इसके पीछे छिपे हैं अन्य कारण?

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। बालों का झड़ना आज के समय में एक बेहद आम समस्या बन चुका है, जिससे कम उम्र के लोग भी जूझ रहे हैं। अक्सर लोग हेयर फॉल शुरू होते ही महंगे शैंपू, तेल और तरह-तरह के हेयर केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगते हैं। हालांकि, बाहरी उपचारों से हर बार समाधान नहीं मिलता, क्योंकि बालों की सेहत का सीधा संबंध हमारे अंदरूनी स्वास्थ्य और जीवनशैली से होता है।
हेयर फॉल के मुख्य कारण
बालों के झड़ने के पीछे हर व्यक्ति में एक जैसी वजह नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार इसके कई आंतरिक और बाहरी कारण हो सकते हैं:
पोषक तत्वों की कमी: शरीर में आयरन, प्रोटीन, जिंक और बायोटिन जैसे जरूरी तत्वों की कमी बालों को कमजोर कर सकती है।
तनाव और नींद की कमी: मानसिक तनाव और अपर्याप्त नींद बालों के विकास चक्र को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।
हार्मोनल असंतुलन और स्वास्थ्य समस्याएं: थायरॉयड असंतुलन या आनुवंशिक कारण भी गंजेपन और बालों के पतले होने का कारण बनते हैं।
क्या कैल्शियम की कमी से झड़ते हैं बाल?
आमतौर पर लोग कैल्शियम को केवल हड्डियों की मजबूती से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका असर बालों पर भी पड़ता है। लंबे समय तक कैल्शियम की कमी (हाइपोकैल्सीमिया) रहने से बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं और बालों के निर्माण के लिए जरूरी केराटिन के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे बाल रूखे, कमजोर और पतले होकर टूटने लगते हैं। हालांकि, केवल कैल्शियम की कमी से ही बाल झड़ने की समस्या होना कम ही मामलों में देखा जाता है, इसके साथ हड्डियों या घुटनों से जुड़ी कमजोरी भी महसूस हो सकती है।
विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?
डर्मेटोलॉजिस्ट का मानना है कि हर किसी को बालों के झड़ने पर बिना सोचे-समझे सप्लीमेंट्स या विटामिंस नहीं खाने चाहिए। जरूरत से ज्यादा पोषक तत्वों का सेवन शरीर को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान दे सकता है। इसलिए किसी भी विशेष कमी का अंदेशा होने पर डॉक्टर की सलाह से ब्लड टेस्ट करवाकर ही सही इलाज या दवाइयां लेनी चाहिए।
सामान्य झड़ना बनाम गंभीर समस्या
रोजाना 30 से 50 बालों का गिरना एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन अगर बाल अचानक गुच्छों में झड़ने लगें, हेयरलाइन पीछे खिसकने लगे, सिर पर गोल पैच बनने लगें या स्कैल्प पर लालिमा व सूजन दिखे, तो यह चिंता का विषय है। ऐसी स्थिति में घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय समय पर चिकित्सीय जांच कराना ही समझदारी है।
















