पीएम आवास योजना से बदला जीवन : मिट्टी के कच्चे मकान की जगह मिला भूपेन्द्र कर्ष को अपना पक्का आशियाना

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में स्थित धरदेई गांव के रहने वाले भूपेन्द्र कुमार कर्ष का अपने परिवार के लिए एक मजबूत मकान बनाने का सपना आखिरकार पूरा हो गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की मदद से उन्हें सुरक्षित और सर्वसुविधायुक्त घर प्राप्त हुआ है, जिससे उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है।
48 वर्षीय भूपेन्द्र कर्ष खेती और मजदूरी करके अपने चार सदस्यीय परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आय के सीमित साधन होने की वजह से वे वर्षों से मिट्टी और खपरैल की ढहती छत वाले मकान में रहने को विवश थे। बारिश के दिनों में पानी टपकने और छप्पर गिरने के डर से उनका परिवार लगातार परेशान रहता था।
वर्ष 2024-25 में योजना के तहत पात्रता मिलने पर उनके नाम से पक्के मकान की मंजूरी जारी की गई। सरकारी आर्थिक सहायता की किस्तों के साथ-साथ धरदेई ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों, डिजिटल सुविधा केंद्र और स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों ने निर्माण में पूरा सहयोग किया। इस दौरान उन्हें 90 दिनों की मनरेगा मजदूरी का भुगतान भी मिला, जिससे आर्थिक राहत मिली।
मुख्य बदलाव और लाभ:
कच्चे घर से मुक्ति: बारिश और मौसम की अनिश्चितताओं से राहत।
स्थानीय सहयोग: स्वयं सहायता समूहों द्वारा सेंट्रिंग सामग्री और पंचायत द्वारा आवश्यक मार्गदर्शन।
रोजगार सहायता: निर्माण अवधि में 90 दिन का मजदूरी भुगतान।
सुरक्षित जीवन: परिवार को मिला सम्मानजनक और आत्मनिर्भर माहौल।
भूपेन्द्र कर्ष ने शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आर्थिक तंगी के बीच पक्का मकान बना पाना उनके लिए असंभव सा था, लेकिन सरकारी योजना के सहयोग से अब उनके परिवार का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित महसूस हो रहा है।
















