बांग्लादेश में ISI की बढ़ती पैठ से भारत की बढ़ी चिंता, DGFI की पाक यात्रा ने बढ़ाई हलचल

नई दिल्ली (एजेंसी)। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच लगातार प्रगाढ़ होते सैन्य और खुफिया संबंधों ने दक्षिण एशियाई राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बांग्लादेश की सैन्य खुफिया संस्था (DGFI) के छह सदस्यों का एक दल कर्नल मगफूज-उल-बारी की अगुवाई में पाकिस्तान पहुंचा है। इस कदम को दोनों मुल्कों के बीच सुरक्षा के मोर्चे पर मजबूत होते तालमेल के रूप में देखा जा रहा है।
खुफिया मोर्चे पर बढ़ता संपर्क
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से दोनों देशों के रक्षा एवं खुफिया तंत्र के बीच संवाद में तेजी आई है। इससे पूर्व अप्रैल 2026 में DGFI प्रमुख मेजर जनरल कैसर रशीद चौधरी ने इस्लामाबाद की यात्रा कर पाकिस्तानी सैन्य कमान और आईएसआई (ISI) के शीर्ष अधिकारियों से वार्ता की थी। इतना ही नहीं, दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों के मध्य पाकिस्तान के JF-17 थंडर लड़ाकू जेट विमानों की खरीद को लेकर भी रणनीतिक चर्चा हो चुकी है।
रणनीतिक संतुलन या भारत पर दबाव?
पूर्व राजनयिक अनिल त्रिगुणायत का मानना है कि इस्लामाबाद की ओर बांग्लादेश का यह झुकाव नई दिल्ली के साथ अपनी बातचीत में बढ़त हासिल करने की एक रणनीति हो सकती है। विशेषज्ञों का आकलन है कि बांग्लादेश, पाकिस्तान और चीन के करीब जाकर भारत के समक्ष अपनी शर्तें रखने की कोशिश में है।
हालांकि, भारत और बांग्लादेश की साझा लंबी भू-सीमा, प्रगाढ़ व्यापारिक संबंधों और आर्थिक निर्भरता को देखते हुए ढाका के लिए भारत से पूरी तरह दूरी बनाना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा।
भारत की सुरक्षा और कूटनीतिक रुख
ढाका के नए सियासी माहौल में पाकिस्तानी खुफिया तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों का प्रभाव बढ़ना भारत के पूर्वी सीमा क्षेत्र के लिए एक रणनीतिक चुनौती पेश कर सकता है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि भारत, बांग्लादेश के साथ परस्पर सम्मान और साझा हितों पर आधारित एक ‘सकारात्मक और रचनात्मक’ रिश्ता बनाए रखना चाहता है। फिर भी, इस्लामाबाद और ढाका के बीच बढ़ती खुफिया गतिविधियों और सैन्य समझौतों पर भारत लगातार निगरानी रख रहा है।
















