बुजुर्गों में भूलने की बीमारी : सिर्फ डिमेंशिया ही नहीं, ये 4 कारण भी हो सकते हैं जिम्मेदार

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। उम्र ढलने के साथ छोटी-मोटी बातें भूल जाना या किसी का नाम तुरंत याद न आना एक सामान्य प्रक्रिया हो सकती है। शरीर के साथ-साथ उम्र बढ़ने पर दिमाग की कार्यशैली और गति में भी धीमापन आता है। लेकिन हर बार याददाश्त की कमजोरी को केवल बुढ़ापे का असर मानकर अनदेखा करना सही नहीं है।
60 की उम्र के बाद अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, यह समझना बहुत जरूरी है कि सामान्य उम्रदराज भूल और डिमेंशिया में क्या फर्क है:
सामान्य भूल: सामान रखकर भूलना या कोई तारीख देर से याद आना, लेकिन व्यक्ति अपने दैनिक काम बिना किसी मदद के खुद कर लेता है।
डिमेंशिया के लक्षण: एक ही सवाल बार-बार दोहराना, जाने-पहचाने रास्तों को भूल जाना, बातचीत में सही शब्द न मिलना, पैसों का हिसाब न रख पाना और स्वभाव में अचानक बदलाव आना।
डिमेंशिया के अलावा याददाश्त कमजोर होने की अन्य वजहें
अगर किसी बुजुर्ग की याददाश्त कमजोर हो रही है, तो इसका मतलब हमेशा डिमेंशिया ही नहीं होता। डॉक्टर के अनुसार इसके पीछे कई अन्य चिकित्सीय कारण भी हो सकते हैं जिनका इलाज संभव है:
नींद की कमी: पर्याप्त और गहरी नींद न मिलना दिमाग की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।
तनाव और डिप्रेशन: मानसिक तनाव और अवसाद के कारण भी एकाग्रता और याददाश्त में कमी आती है।
थायरॉइड की समस्या: शरीर में थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन मस्तिष्क के कार्यों को धीमा कर सकता है।
विटामिन B12 की कमी: यह पोषक तत्व तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और दिमागी सेहत के लिए बेहद जरूरी है।
डॉक्टर से परामर्श कब लें?
यदि भूलने की समस्या लगातार बढ़ रही हो और इससे बुजुर्ग की दिनचर्या व निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो रही हो, तो इसे हल्के में न लें। समय पर डॉक्टरी जांच कराने से सही कारण का पता लगाकर उचित इलाज शुरू किया जा सकता है।
















