कांग्रेस पर कुमारस्वामी का बड़ा हमला : बोले– ‘वोट चोरी का आरोप लगाना राक्षस द्वारा गीता पाठ जैसा’

बेंगलुरु (एजेंसी)। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक की सत्तासीन कांग्रेस सरकार को ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) के विरोध को लेकर आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कांग्रेस के इस रुख को सरासर पाखंड करार देते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत में खुद कांग्रेस ने ही बड़े पैमाने पर धांधली और गड़बड़ियाँ की थीं।
कुमारस्वामी ने एक बयान जारी कर कहा कि जो पार्टी खुद अनियमितताओं में लिप्त रही, उसका अब इसके खिलाफ आवाज उठाना हास्यास्पद है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और कैबिनेट मंत्रियों के सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने पर नाराजगी जताई। कुमारस्वामी ने कहा कि मंत्रियों को कैबिनेट बैठक छोड़कर आम जनता को ट्रैफिक जाम में परेशान नहीं करना चाहिए था। उन्होंने पुलिस से सड़क जाम करने वाले कांग्रेस नेताओं पर तत्काल कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
कांग्रेस के रवैये पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “कांग्रेस द्वारा वोट चोरी का मुद्दा उठाना वैसा ही प्रतीत होता है जैसे कोई राक्षस भगवद गीता का ज्ञान दे रहा हो।” उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची सुधार के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता शादी हॉल, कम्युनिटी सेंटर और निजी मकानों में लोगों को इकट्ठा करके प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे थे। जेडीएस (JDS) और एनडीए (NDA) के घटक दलों ने इस बाबत चुनाव आयोग में आधिकारिक शिकायत भी दर्ज कराई थी।
कुमारस्वामी के अनुसार, जब चुनाव आयोग से शिकायतें की गईं, तब राज्य सरकार ने चुप्पी साध रखी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली के आलाकमान के दबाव में आकर अब कर्नाटक कांग्रेस यह नया नाटक रच रही है।
इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि यह पूरा विरोध प्रदर्शन बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट से जुड़े कथित जमीन घोटाले से जनता का ध्यान भटकाने की एक रणनीति है। उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए उप-मुख्यमंत्री और उनके परिवार द्वारा की गई कथित मिलीभगत के सबूत पेश किए थे। उसी राजनीतिक घेराबंदी से बचने के लिए मतदाता सूची के मुद्दे को तूल दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले उप-मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के समक्ष धरना दिया था और ‘फॉर्म 7’ के जरिए जायज मतदाताओं के नाम काटने की साजिश की आपराधिक जांच कराने की मांग की थी।
















