अबूझमाड़ में शिक्षा की नई सुबह : भाटपाल के सुरक्षा कैंप को बनाया गया आदिवासी विद्यार्थियों का छात्रावास

नारायणपुर। बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में विकास और बदलाव की एक अनूठी बानगी देखने को मिली है। जिले के भाटपाल गांव में करीब 15 वर्षों तक सुरक्षा बलों का ठिकाना रहा कैंप अब जनजातीय विद्यार्थियों के लिए आधुनिक आवासीय शिक्षा परिसर में तब्दील हो चुका है। बस्तर संभाग में अपनी तरह की इस पहली पहल से दूरस्थ और दुर्गम गांवों के बच्चों के लिए शिक्षा के नए रास्ते खुल गए हैं।
सुरक्षा से शिक्षा का सफर
नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित भाटपाल का यह परिसर लंबे समय तक नक्सल विरोधी अभियानों और सुरक्षा व्यवस्था का केंद्र रहा। क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों के बाद जब यह परिसर खाली हुआ, तो जिला प्रशासन ने इसे वीरान छोड़ने के बजाय बच्चों के भविष्य निर्माण का जरिया बनाने का फैसला किया। कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन की विशेष पहल पर इस पूर्व सुरक्षा कैंप को छात्रवास के रूप में पुनर्विकसित किया गया और 11 अगस्त 2026 से यहां आवासीय व्यवस्था शुरू हो गई।
एक ही परिसर में दो छात्रावास और बेहतर सुविधाएं
भाटपाल के इस नए शैक्षणिक परिसर में अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए दो अलग-अलग छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं, जिससे बच्चों को पढ़ाई का अनुकूल माहौल मिल रहा है:
प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास: कक्षा 6वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 100 सीटें स्वीकृत हैं, जिनके मुकाबले वर्तमान में 114 बच्चे यहां रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।
पोस्ट-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास: कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए 50 सीटें निर्धारित हैं, जिसमें वर्तमान में 39 विद्यार्थी निवासरत हैं। यह केंद्र एजुकेशन सिटी कुतुल से जुड़े विद्यार्थियों की आवासीय जरूरतों को भी पूरा कर रहा है।
दूरी की बाधा हुई दूर, स्कूल सिर्फ 50 मीटर दूर
दूरदराज के इलाकों से आने वाले विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबी दूरी और आवास की होती थी। भाटपाल में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इस छात्रावास से महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित है। इससे बच्चों का रोज का आवागमन का संघर्ष खत्म हो गया है और वे अपना कीमती समय पढ़ाई में लगा पा रहे हैं। इसके अलावा, दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए कमरों की तलाश में भटकने वाले विद्यार्थियों और उनके परिवारों का आर्थिक बोझ भी कम हुआ है।
छात्रों के चेहरों पर संतोष और उम्मीद
हलामीमुंजमेटा से आने वाले नौवीं कक्षा के छात्र रितेश सोनी और राजबेड़ा से लगभग 22 किलोमीटर दूर से आए 12वीं के छात्र कोमेंद्र जैसे कई विद्यार्थियों का कहना है कि अब उन्हें सुरक्षित माहौल और पौष्टिक भोजन के साथ पढ़ाई के लिए एक बेहतर ठिकाना मिल गया है।
हाल ही में कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन ने इस परिसर का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों के कमरों, स्वच्छता और किचन में बन रहे भोजन की गुणवत्ता को खुद परखा तथा बच्चों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया।
बदलते अबूझमाड़ की नई पहचान
कभी जिस परिसर की पहचान हथियारों और सुरक्षा गश्त से जुड़ी थी, आज वहां स्कूल यूनिफॉर्म पहने बच्चे किताबों के साथ अपने सुनहरे कल की तैयारी कर रहे हैं। भाटपाल का यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि अबूझमाड़ में बदलाव का दायरा अब केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी के जीवन में शिक्षा और अवसरों के उजाले को भी तेजी से फैला रहा है।
















