रूस से डीजल डील पर ट्रंप और जेलेंस्की आमने-सामने : यूक्रेनी राष्ट्रपति बोले- यह सीधे तौर पर युद्ध में फंडिंग है

नई दिल्ली (एजेंसी)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। हाल ही में ट्रंप ने रूस से बड़े पैमाने पर डीजल खरीदने का ऐलान किया है, जिस पर जेलेंस्की ने कड़ी आपत्ति जताई है। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इस समझौते को रूस के युद्ध प्रयासों में आर्थिक मदद करार दिया है।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ चर्चा के बाद घोषणा की है कि रूस अमेरिकी और वैश्विक बाजारों को भारी मात्रा में डीजल की आपूर्ति करेगा। ‘ट्रुथ सोशल’ पर दी गई जानकारी के मुताबिक, मॉस्को शुरुआती चरण में तुरंत 3 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा डीजल भेजेगा। इसके बाद, नवंबर महीने में 5 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति की जाएगी और आगे चलकर 10 लाख मीट्रिक टन और ईंधन दिया जाएगा। ट्रंप प्रशासन का यह कदम आगामी मिडटर्म चुनावों से पहले देश में ईंधन की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के मकसद से उठाया गया है।
जेलेंस्की की कड़ी प्रतिक्रिया
इस समझौते से भड़के जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पुतिन को इस तरह के व्यावसायिक अवसर या तोहफे देना सभ्य दुनिया के लिए शांति या किसी भी अन्य रूप में फायदेमंद नहीं है। उनका तर्क है कि पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से मिलने वाला पैसा सीधे तौर पर रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, जिसका इस्तेमाल वह यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को जारी रखने के लिए करेगा। जेलेंस्की ने इसे कूटनीति और शांति स्थापना के प्रयासों को कमजोर करने वाला कदम बताया है।
“साझेदारों द्वारा मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा”
जेलेंस्की ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जब अमेरिकी धरती पर यूक्रेन का प्रतिनिधिमंडल संघर्ष को समाप्त करने के रास्ते तलाशने के लिए मौजूद था, तब यह फैसला लिया गया। उन्होंने सहयोगियों के इस रवैये पर दुख जताते हुए कहा कि ऐसा महसूस होता है जैसे उनकी टीम को केवल एक मोहरे (पॉन) की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जो कि मजबूत साझेदारों के बीच सही व्यवहार नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार और यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी कूटनीति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ अमेरिका अपने नागरिकों को महंगाई से राहत देने के प्रयास में जुटा है, वहीं यूक्रेन को डर है कि रूस के साथ यह व्यापार उसकी सैन्य ताकत को और बढ़ा देगा।
















