वीबी-जी राम जी योजना : श्रमिकों के ई-केवाईसी में छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक प्रदर्शन, बने देश के शीर्ष राज्यों में शामिल

रायपुर। ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ ने एक नई मिसाल कायम की है। राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के दिशानिर्देशों के चलते छत्तीसगढ़ ने ‘वीबी-जी राम जी’ योजना के तहत श्रमिकों के डिजिटल सत्यापन (ई-केवाईसी) में देश भर में कीर्तिमान स्थापित किया है।
प्रशासनिक पारदर्शिता और योजनाओं के सही क्रियान्वयन के बूते राज्य ने कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल—दोनों श्रेणियों में राष्ट्रीय औसत को काफी पीछे छोड़ दिया है।
अकुशल श्रमिक श्रेणी: बड़े राज्यों में छत्तीसगढ़ अव्वल
हालिया केंद्रीय आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में अकुशल श्रेणी के कुल पंजीकृत 79.23 लाख श्रमिकों में से 76.20 लाख से अधिक का आधार लिंक हो चुका है, जबकि 72.39 लाख से अधिक श्रमिकों का ई-केवाईसी सत्यापन पूरा कर लिया गया है।
उपलब्धि: 91.37% सफलता दर के साथ छत्तीसगढ़ देश के सभी बड़े राज्यों में प्रथम स्थान पर है।
संयुक्त रैंकिंग: केंद्र शासित प्रदेशों व राज्यों की समग्र सूची में राज्य को चौथा स्थान (लद्दाख, मिजोरम और त्रिपुरा के बाद) मिला है।
राष्ट्रीय तुलना: जहाँ इस श्रेणी का राष्ट्रीय औसत 61.01% है, वहीं छत्तीसगढ़ उससे 30.36% आगे है। राज्य ने पश्चिम बंगाल (89.10%), तमिलनाडु (83.17%), मध्य प्रदेश (63.78%) और उत्तर प्रदेश (56.58%) जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।
कुशल एवं अर्द्धकुशल श्रेणी: सभी राज्यों में पहला स्थान
कुशल और अर्द्धकुशल श्रमिकों के सत्यापन में भी छत्तीसगढ़ ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। राज्य में दर्ज 77.8 हजार से अधिक श्रमिकों में से 82.28% (64 हजार से अधिक) की ई-केवाईसी पूर्ण हो चुकी है।
राज्यों में स्थान: इस श्रेणी में देश के समस्त राज्यों के बीच छत्तीसगढ़ प्रथम स्थान पर है (समग्र रैंकिंग में दादरा-नगर हवेली एवं दमन-दीव के बाद दूसरा स्थान)।
विशाल अंतर: इस वर्ग में जहाँ राष्ट्रीय औसत महज 13.53% है, वहीं छत्तीसगढ़ की उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर से 68.75% अधिक है। महाराष्ट्र (56.70%), कर्नाटक (36.95%) और गुजरात (27.04%) जैसे औद्योगिक राज्य छत्तीसगढ़ से काफी पीछे रह गए हैं।
कुल 73 लाख से अधिक श्रमिकों का हुआ डिजिटल सत्यापन
दोनों श्रेणियों को मिलाकर छत्तीसगढ़ के कुल 80 लाख से अधिक पंजीकृत श्रमिकों में से 91.28% (73.03 लाख से अधिक) श्रमिकों की ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
योजना के लाभ और प्रभाव:
डिजिटल सत्यापन और ई-केवाईसी पूर्ण होने से:
श्रमिकों के रिकॉर्ड और पहचान की सटीकता सुनिश्चित होगी।
मजदूरी भुगतान और रोजगार आवंटन में पूर्ण पारदर्शिता आएगी।
फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और डिजिटल व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है।
















