छत्तीसगढ़ में नारी शक्ति की नई उड़ान : पोषण और स्वावलंबन का अनोखा मॉडल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सुधार के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और कुपोषण को समाप्त करने के उद्देश्य से एक प्रभावी कदम उठाया है। इसके तहत, आंगनबाड़ी केंद्रों में दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार (रेडी-टू-ईट) को बनाने और बांटने का पूरा जिम्मा अब स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) को सौंप दिया गया है। इस निर्णय ने ग्रामीण अंचलों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ महिलाओं में एक नया आत्मविश्वास जगाया है।
पायलट प्रोजेक्ट से मिली नई दिशा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में शुरू हुई इस व्यवस्था से पहले यह काम बाहरी संस्थाएं करती थीं। अब इसे पूरी तरह स्थानीय स्तर पर केंद्रित कर दिया गया है। शुरुआत में इस योजना को एक परीक्षण (पायलट प्रोजेक्ट) के तौर पर छह जिलों में लागू किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
रायगढ़
कोरबा
सूरजपुर
बस्तर
दंतेवाड़ा
बलौदाबाजार-भाटापारा
इन जिलों के कुल 42 महिला समूहों को इस काम से जोड़ा गया है। इस पहल की शुरुआत सबसे पहले रायगढ़ जिले से हुई, जो आज पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन चुका है। वर्तमान में कोरबा और रायगढ़ में 10-10, सूरजपुर और बलौदाबाजार-भाटापारा में 7-7, बस्तर में 6 तथा दंतेवाड़ा में 2 समूह पूरी सक्रियता से गुणवत्तापूर्ण आहार तैयार कर आंगनबाड़ियों तक पहुंचा रहे हैं।
कुशल प्रबंधन और आधुनिक तकनीक का मेल
इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि महिलाएं यहाँ सिर्फ श्रमिक के रूप में काम नहीं कर रही हैं, बल्कि वे पूरे बिजनेस मॉडल को खुद संभाल रही हैं। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, जिसमें शामिल हैं:
आधुनिक मशीनों का संचालन
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच
सुरक्षित पैकेजिंग और भंडारण
वित्तीय लेखा-जोखा और वितरण प्रबंधन
पौष्टिकता से भरपूर और सेहत के लिए वरदान
सूरजपुर जिले के भैयाथान, प्रतापपुर और सूरजपुर विकासखंडों में लगे संयंत्र इसका बेहतरीन उदाहरण हैं। यहाँ काम करने वाली महिलाएं पौष्टिक नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार जैसी खाद्य सामग्रियां तैयार कर रही हैं। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं की सेहत को ध्यान में रखते हुए इस आहार में जरूरी पोषक तत्व मिलाए जाते हैं:
मुख्य पोषक तत्व: विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘डी’, आयरन, कैल्शियम, जिंक और फोलिक एसिड।
सूरजपुर जिले में निर्माण के साथ-साथ वितरण की कमान भी महिलाओं के हाथों में है, जहाँ लगभग 430 ग्रामीण महिलाएं इस आहार को समय पर आंगनबाड़ियों तक पहुंचाने का जिम्मा संभाल रही हैं।
सामाजिक और आर्थिक बदलाव की बयार
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के अनुसार, यह योजना राज्य के पोषण स्तर को सुधारने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने में मील का पत्थर साबित हो रही है।
यह पहल केवल रोजगार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गहरे सामाजिक बदलाव की कहानी है। जो महिलाएं कभी सिर्फ घर के कामकाज तक सीमित थीं, वे आज बड़ी उत्पादन इकाइयों का नेतृत्व कर रही हैं। नियमित आमदनी ने उनके परिवारों को आर्थिक मजबूती दी है और समाज में उनके मान-सम्मान को बढ़ाया है। छत्तीसगढ़ का यह प्रयोग साबित करता है कि जब महिलाओं को सही अवसर और संसाधन मिलते हैं, तो वे पूरे समाज की तस्वीर बदल सकती हैं।
















