भारतनेट से छत्तीसगढ़ के गांवों को डिजिटल शक्ति मिलेगी : बृजमोहन अग्रवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुदूर ग्रामीण अंचलों तक डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से भारतनेट योजना पर तेज़ी से काम किया जा रहा है। हाल ही में लोकसभा में रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा उठाए गए विषय के उत्तर में केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने परियोजना की ताज़ा स्थिति साझा की।
₹2,757 करोड़ का बजट आवंटित
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 30 जून 2026 तक छत्तीसगढ़ के लिए भारतनेट के विभिन्न चरणों के अंतर्गत कुल ₹2,757 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है। इसका विवरण इस प्रकार है:
प्रथम चरण (Phase-I): ₹560 करोड़
द्वितीय चरण (Phase-II): ₹2,065 करोड़
संशोधित भारतनेट कार्यक्रम: ₹132 करोड़
9,600 से अधिक पंचायतें ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जुड़ीं
राज्य में डिजिटल आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाते हुए अब तक 9,681 ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) से जोड़ दिया गया है। इनमें से 833 ग्राम पंचायतों में इंटरनेट सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं।
गांवों के सर्वांगीण विकास का जरिया बनेगी कनेक्टिविटी
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘डिजिटल इंडिया’ विजन देश के गांवों की तस्वीर बदल रहा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि ग्राम पंचायतों में कनेक्टिविटी का पहुँचना एक बड़ी उपलब्धि है, और अब इन सेवाओं के क्रियान्वयन में तेज़ी लाकर ग्रामीणों को इनका सीधा लाभ पहुँचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
“डिजिटल कनेक्टिविटी केवल इंटरनेट की सुविधा भर नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन और ई-गवर्नेंस सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की नई धुरी है।”
— बृजमोहन अग्रवाल, सांसद (रायपुर)
‘डिजाइन, बिल्ड, ऑपरेट और मैनटेन’ मॉडल पर होगा काम
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को ‘डिजाइन, बिल्ड, ऑपरेट और मैनटेन’ (DBOM) मॉडल के तहत लागू किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में इसके संचालन के लिए राज्य-नेतृत्व मॉडल को सैद्धांतिक मंज़ूरी मिल चुकी है। केंद्र और राज्य के परस्पर समन्वय से आने वाले समय में प्रदेश की हर ग्राम पंचायत तक डिजिटल सेवाओं का विस्तार और तेज़ी से संभव हो सकेगा।
















