छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख : दूषित पनीर और अमानक मैदा पर लगा बैन, कई प्रतिष्ठानों की जांच जारी

रायपुर। राज्य के नागरिकों की सेहत और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए छत्तीसगढ़ सरकार और प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की सघन जांच के दौरान मिलावट और सुरक्षा मानकों में बड़ी खामियां पाई गईं, जिसके बाद संबंधित उत्पादों पर त्वरित कार्रवाई की गई है।
पनीर में मिलावट और फॉर्च्यून मैदा के खास बैच पर रोक
जांच अभियान के तहत गौरेला से पनीर का सैंपल लेकर लैब भेजा गया था। रिपोर्ट में पनीर के भीतर तय सीमा से 77 प्रतिशत अधिक वेजिटेबल फैट पाया गया, जिसके आधार पर खाद्य विश्लेषक ने इसे असुरक्षित घोषित कर दिया।
इसके अलावा, विभाग ने ‘फॉर्च्यून मैदा’ के एक विशिष्ट बैच (बैच संख्या: FLMD50059A) की बिक्री और वितरण पर जिले भर में तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। व्यापारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे इस बैच का स्टॉक बाजार में न बेचें।
व्यापक निरीक्षण और कई ब्रांड्स के सैंपल जब्त
खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के इरादे से स्थानीय दुकानों और केंद्रों पर लगातार दबिश दी जा रही है। जांच टीम ने ‘गृहस्थी सुपर बाजार’ से मैगी व साबूदाना के नमूने लिए हैं, जबकि ‘786 बिरयानी सेंटर’ और ‘हरी कन्फेक्शनरी’ से भी विभिन्न खाद्य सामग्रियां टेस्ट के लिए लैब भेजी गई हैं। लैब रिपोर्ट आते ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
व्यापारियों को चेतावनी और आम जनता से अपील
प्रशासन ने सभी खाद्य निर्माताओं, विक्रेताओं और दुकानदारों को निर्माण, स्टोरेज और सप्लाई में स्वच्छता व नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने साफ किया है कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
साथ ही, खाद्य विभाग ने आम नागरिकों से भी सतर्क रहने का आग्रह किया है। सामान खरीदते वक्त पैकेजिंग, मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और लेबल पर दी गई जानकारियों की जांच जरूर करें। किसी भी प्रकार की संदिग्ध या अमानक खाद्य सामग्री की शिकायत तुरंत विभाग में दर्ज कराएं।
















