सड़कों की बदहाली पर सख्त हुए मुख्यमंत्री : लापरवाही बरतने वाले अधिकारी को बैठक से किया बाहर

बलरामपुर। बलरामपुर में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा बैठक में कड़ा रुख अपनाया। मुख्यमंत्री ने न केवल योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया, बल्कि अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें सीधी चेतावनी भी दी। बैठक के दौरान उस समय स्थिति गंभीर हो गई जब लोक निर्माण विभाग (PWD) का एक अधिकारी सड़क मरम्मत से संबंधित सही आंकड़े पेश नहीं कर पाया। इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से उन्हें बैठक से बाहर जाने और अपने सचिव से परामर्श कर सही जानकारी लेकर आने का निर्देश दिया।
विकास का पैमाना है सड़कें: मानसून से पहले दुरुस्त हों मार्ग
मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया कि सरकार की कार्यकुशलता और विकास सबसे पहले सड़कों की स्थिति से ही परिलक्षित होता है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि मानसून के आगमन से पहले प्रदेश की एक भी सड़क जर्जर अवस्था में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आवासीय क्षेत्रों की सड़कों की मरम्मत को विशेष प्राथमिकता देने पर जोर दिया। साथ ही, यह भी चेतावनी दी कि कार्य में कोताही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सुशासन की ओर कदम: डिजिटलीकरण और हेल्पलाइन की सौगात
प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और गति लाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:
राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण: राज्य के सभी खसरा-नक्शा रिकॉर्ड डिजिटल किए जाएंगे, जिससे नागरिक घर बैठे डिजिटल हस्ताक्षर युक्त दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन: आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जल्द ही एक टोल-फ्री हेल्पलाइन सेवा शुरू की जाएगी।
राजस्व मामलों का निराकरण: कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे राजस्व से जुड़े प्रकरणों का समय-सीमा के भीतर निपटारा सुनिश्चित करें ताकि आम लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।
डीएमएफ निधि और जन-कल्याण पर निर्देश
मुख्यमंत्री ने जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) निधि के उपयोग को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस फंड का अधिकतम लाभ उन गांवों को मिलना चाहिए जो खनन से सीधे प्रभावित हैं। मुख्यालय या अन्य कार्यों में इस राशि का विचलन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बलरामपुर के सीमावर्ती इलाकों में खनिज संसाधनों के पारदर्शी उपयोग और नागरिकों के लिए पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं तथा किसानों के लिए बीज-खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के आदेश दिए।
‘सेवा तीर्थ’ की भावना और अधिकारियों की जवाबदेही
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नसीहत दी कि वे सरकारी कार्यालयों को ‘सेवा तीर्थ’ के रूप में देखें। उन्होंने जन प्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार करने को कहा। कलेक्टरों को अपने अधीनस्थ अमले के काम का नियमित मूल्यांकन करने और लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में प्रभारी मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सरगुजा सांसद श्री चिंतामणि महाराज, स्थानीय विधायकगण और जिला पंचायत अध्यक्ष सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
















