सुशासन का संकल्प : गाँव-गाँव तक पहुँचती खुशहाली और त्वरित समाधान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ‘सुशासन तिहार 2026’ जन-सेवा और प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक नई इबारत लिख रहा है। यह आयोजन मात्र एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच बढ़ते अटूट भरोसे का प्रतीक बन गया है। सरकार अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि चौपालों के माध्यम से सीधे अंतिम व्यक्ति तक पहुँचकर उनकी समस्याओं का मौके पर ही निपटारा कर रही है।
समस्याओं का अंत, उम्मीदों का उदय
राज्य सरकार का मुख्य ध्येय सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचाना है। सुशासन की इस मुहिम के तहत आयोजित शिविरों में न केवल शिकायतों को दर्ज किया जा रहा है, बल्कि बेहद संजीदगी के साथ उनका त्वरित निराकरण भी सुनिश्चित किया जा रहा है।
नवापारा के किसान शिव कंवर की बदली किस्मत
सुशासन की सफलता की एक जीवंत तस्वीर कोरबा जिले के ईरफ शिविर में देखने को मिली। यहाँ के ग्राम नवापारा के निवासी श्री शिव कंवर पिछले कई वर्षों से सिंचाई की समस्या से जूझ रहे थे।
आजीविका का संकट: श्री कंवर लगभग 3-4 एकड़ में धान की खेती करते हैं, जो उनके परिवार के पालन-पोषण का एकमात्र जरिया है।
पुरानी बाधा: सिंचाई के संसाधनों के अभाव में उनकी फसल की पैदावार कम हो रही थी, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा था।
प्रशासनिक पहल: सुशासन तिहार के दौरान उनकी इस समस्या को प्राथमिकता पर लिया गया। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें पेट्रोल पंप (सिंचाई पंप) उपलब्ध कराया।
सशक्त किसान, समृद्ध खेती
नया पंप मिलने से अब शिव कंवर के खेतों तक पानी पहुँचना आसान हो गया है। अब वे बिना किसी चिंता के समय पर सिंचाई कर सकेंगे, जिससे न केवल फसल की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि उनकी आय में भी वृद्धि होगी।
“सुशासन तिहार ने मेरी वर्षों पुरानी चिंता दूर कर दी है। अब मैं बेहतर तरीके से खेती कर पाऊँगा। इस मदद के लिए मैं मुख्यमंत्री जी और जिला प्रशासन का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ।” — शिव कंवर, लाभार्थी किसान
‘सुशासन तिहार’ आज छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में सकारात्मक परिवर्तन का वाहक बन चुका है। यह पहल स्पष्ट करती है कि जब प्रशासन संवेदनशील हो, तो विकास की किरण हर घर तक पहुँचती है।
















