राज्यसभा चुनाव 2026 : सत्ता के गलियारों में हलचल, क्या बिहार को मिलेगा नया मुख्यमंत्री?

पटना (एजेंसी)। आमतौर पर शांत रहने वाले राज्यसभा चुनाव इस बार लोकसभा चुनाव जैसी गहमागहमी पैदा कर रहे हैं। इस साल के द्विवार्षिक चुनावों ने न केवल समीकरण बदल दिए हैं, बल्कि गठबंधन की नई राजनीति को भी जन्म दिया है। विशेष रूप से बिहार और महाराष्ट्र में सियासी पारा सातवें आसमान पर है।
बिहार: नीतीश कुमार का बड़ा कदम और भाजपा का ‘सीएम’ सपना
बिहार की राजनीति में आज यानी 5 मार्च का दिन बेहद निर्णायक साबित हो सकता है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं, जिसके बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की पूरी संभावना है।
बदलाव के संकेत: जदयू के मंत्रियों के बयानों से स्पष्ट है कि नीतीश कुमार उच्च सदन जाने का फैसला खुद लेंगे। यदि वे आज नामांकन दाखिल करते हैं, तो उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा।
भाजपा की दावेदारी: नीतीश के जाने के बाद भाजपा का बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का दशकों पुराना सपना सच हो सकता है। संभावित नामों में सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय की चर्चा सबसे तेज है।
नया फॉर्मूला: चर्चा यह भी है कि जेडीयू की ओर से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसमें नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और उनके करीबी विजय चौधरी के नाम रेस में हैं।
महाराष्ट्र: भाजपा ने साधा जातीय और गठबंधन समीकरण
महाराष्ट्र में भाजपा ने राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवारों के चयन में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ और ‘गठबंधन धर्म’ का बखूबी ध्यान रखा है। पार्टी ने चार चेहरों को मैदान में उतारा है:
रामदास आठवले: आरपीआई (ए) प्रमुख और एनडीए के पुराने साथी को फिर से मौका देकर अनुसूचित जाति के मतदाताओं को संदेश दिया गया है।
विनोद तावड़े: पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और रणनीतिकार को राज्यसभा भेजकर संगठन में उनकी पकड़ को मजबूती दी गई है।
माया चिंतामन इवानते और रामराव वाडकुटे: इन नामों के जरिए देवेंद्र फडणवीस के करीबियों और मराठा व जनजाति समुदायों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
महाराष्ट्र की 7 खाली सीटों में से भाजपा 4 पर सुरक्षित है, जबकि बाकी सीटें शिवसेना, एनसीपी और विपक्षी गठबंधन (MVA) के खाते में जाने की उम्मीद है।
विपक्षी एकजुटता: शरद पवार के लिए कांग्रेस और उद्धव का समर्थन
महाविकास अघाड़ी (MVA) में भी इस बार ‘गठबंधन धर्म’ की एक अलग तस्वीर दिखी है। काफी खींचतान के बाद विपक्षी खेमे ने साझा उम्मीदवार पर सहमति बना ली है।
पवार की उम्मीदवारी: एनसीपी (SP) प्रमुख शरद पवार एक बार फिर राज्यसभा जाएंगे। पहले इस सीट को लेकर कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और एनसीपी के बीच असहमति थी, लेकिन अंततः पवार के अनुभव को देखते हुए सभी एक साथ आए।
पर्दे के पीछे की कहानी: सूत्रों के मुताबिक, सुप्रिया सुले ने व्यक्तिगत रूप से कांग्रेस आलाकमान (मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी) और उद्धव ठाकरे से बात की। उद्धव ठाकरे संभवतः आदित्य ठाकरे को राज्यसभा भेजना चाहते थे, लेकिन गठबंधन की एकता बनाए रखने के लिए उन्होंने अपना कदम पीछे खींच लिया।
















