छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में बेटियों के अरमानों को मिली नई उड़ान : मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से सामाजिक क्रांति

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सामूहिक विवाह के आयोजन अब मात्र एक रस्म नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और समरसता का एक बड़ा उत्सव बन चुके हैं। राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने गरीब परिवारों के माथे से चिंता की लकीरें मिटाकर बेटियों के भविष्य को संवारने का काम किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के कुशल नेतृत्व में यह योजना प्रदेश में सुशासन और संवेदनशीलता की नई मिसाल पेश कर रही है।

आर्थिक बोझ से मुक्ति और बेटियों का सम्मान

एक समय था जब निर्धन परिवारों के लिए बेटियों की शादी का खर्च उठाना एक बड़ी चुनौती होती थी, जिसके कारण कई परिवार कर्ज के जाल में फंस जाते थे। इस समस्या को जड़ से मिटाने के लिए राज्य सरकार ने इस योजना के माध्यम से सहायता का हाथ बढ़ाया है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य विवाह को फिजूलखर्ची और दहेज जैसी कुरीतियों से मुक्त कर इसे गरिमापूर्ण बनाना है। विशेष बात यह है कि इसमें केवल सामान्य निर्धन परिवार ही नहीं, बल्कि विधवा, अनाथ और निराश्रित कन्याओं को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे समाज में सुरक्षा का भाव जागृत हुआ है।

सहायता राशि और पात्रता

योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और अंत्योदय कार्डधारी परिवारों की 18 वर्ष से अधिक आयु की बेटियों (प्रति परिवार अधिकतम दो) को लाभ दिया जाता है। सरकार की ओर से दी जाने वाली 50 हजार रुपये की कुल सहायता को इस प्रकार विभाजित किया गया है:

35,000 रुपये: नवविवाहित जोड़े के बैंक खाते या ड्राफ्ट के माध्यम से (आत्मनिर्भर शुरुआत के लिए)।

उपहार व श्रृंगार: वधु के लिए आवश्यक सामग्री और घरेलू सामान।

आयोजन व्यय: प्रति कन्या 8,000 रुपये विवाह की व्यवस्थाओं पर खर्च किए जाते हैं।

कीर्तिमान और उपलब्धियां

छत्तीसगढ़ की इस योजना ने न केवल प्रदेश में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी धमक दिखाई है।

विश्व रिकॉर्ड: 10 फरवरी 2026 को एक साथ 6,412 जोड़ों का विवाह संपन्न कराकर छत्तीसगढ़ ने अपना नाम ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज कराया।

व्यापक कवरेज: अब तक 24 हजार से अधिक बेटियां इस योजना के माध्यम से दाम्पत्य जीवन में प्रवेश कर चुकी हैं।

चालू वर्ष का लक्ष्य: वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3,200 विवाहों का लक्ष्य है, जिसमें से मई 2026 तक 1,732 विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं।

सर्वधर्म समभाव की जीती-जागती तस्वीर

8 मई 2026 को प्रदेशव्यापी स्तर पर आयोजित सामूहिक विवाह समारोहों में छत्तीसगढ़ की अनूठी संस्कृति देखने को मिली। यहाँ हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और विभिन्न जनजातीय समुदायों के जोड़ों ने अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया। यह आयोजन यह संदेश देता है कि शासन की दृष्टि में सभी नागरिक समान हैं और विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँच रहा है।

सुव्यवस्थित संचालन और मंत्री की पहल

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े व्यक्तिगत रूप से इन आयोजनों की निगरानी कर रही हैं। उन्होंने सुनिश्चित किया है कि विवाह स्थलों पर भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों। उनका मानना है कि यह योजना केवल वित्तीय सहायता नहीं है, बल्कि बेटियों को समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने का एक सशक्त माध्यम है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना आज छत्तीसगढ़ के सुशासन का मानवीय चेहरा बन चुकी है, जो आर्थिक अभावों को पीछे छोड़कर खुशहाल समाज की नींव रख रही है।

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