तेन्दूपत्ता संग्राहकों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध : वन मंत्री केदार कश्यप

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले तेन्दूपत्ता संग्राहकों के आर्थिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य के 7.14 लाख से अधिक संग्राहकों के खातों में ₹162.32 करोड़ की प्रोत्साहन राशि (बोनस) ट्रांसफर की गई है। सरकार ने संग्राहकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से तेन्दूपत्ता संग्रहण दर को ₹4,000 से बढ़ाकर अब ₹5,500 प्रति मानक बोरा कर दिया है, जिससे ग्रामीण परिवारों को सीधा वित्तीय लाभ मिल रहा है।
मुख्य आंकड़े और वित्तीय वितरण
सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, संग्रहण और बोनस राशि का विवरण इस प्रकार है:
बोनस वितरण (वर्ष 2023): प्रदेश की 621 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के 7,14,446 संग्राहकों को कुल ₹162.32 करोड़ का भुगतान किया जा रहा है।
संग्रहण पारिश्रमिक (सत्र 2026): चालू सीजन में लगभग 11.15 लाख संग्राहकों को ₹734.25 करोड़ का पारिश्रमिक पहले ही दिया जा चुका है।
भुगतान का माध्यम: सभी तरह के भुगतान पूरी तरह पारदर्शी रखते हुए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं।
पारदर्शिता और आजीविका सुरक्षा पर सरकार का जोर
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता आदिवासी और वनवासी परिवारों को उनके श्रम का उचित मूल्य समय पर दिलाना है। इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और तकनीक-आधारित बनाया गया है ताकि भुगतान में किसी भी तरह की देरी या गड़बड़ी न हो।
तेन्दूपत्ता संग्रहण वनांचल क्षेत्र के लाखों लोगों की आजीविका का मुख्य जरिया है। सरकार का संकल्प है कि भविष्य में भी ऐसी जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को सशक्त बनाया जाए और वन-आधारित रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएं।
















