भारत का एआई और सेमीकंडक्टर विजन : चिप निर्माण से लेकर स्वदेशी मॉडल तक तेज हुई तकनीकी तैयारी

न्युज डेस्क (एजेंसी)। वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दबदबे के बीच भारत ने भी इस तकनीक में आत्मनिर्भर बनने के लिए अपनी रफ्तार बढ़ा दी है। देश में एआई की नींव मजबूत करने के लिए केवल सॉफ्टवेयर या मॉडल्स तक सीमित न रहकर, इसके लिए अनिवार्य हार्डवेयर, कंप्यूटिंग पावर और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया जा रहा है।
सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पर मुख्य जोर
एआई के सुचारू संचालन और डेटा प्रोसेसिंग के लिए सेमीकंडक्टर चिप्स की भूमिका सबसे अहम होती है। इसे ध्यान में रखते हुए देश में चिप निर्माण और पैकेजिंग सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। कई प्रमुख विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के साथ ही अब इसके दूसरे चरण पर भी फोकस किया जा रहा है, जिसमें घरेलू डिजाइन वाले चिप्स, उन्नत पैकेजिंग और निर्माण से जुड़े कच्चे माल व उपकरणों के पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करना शामिल है।
स्वदेशी एआई और इंडियाAI मिशन
‘इंडियाAI मिशन’ के तहत भारत स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक जरूरतों के अनुकूल स्वदेशी फाउंडेशनल मॉडल और लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) तैयार कर रहा है। इसके साथ ही, स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों को उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधाएं और जीपीयू (GPU) संसाधन उपलब्ध कराने के लिए एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है, जिससे अनुसंधान कार्यों को गति मिल सके।
घरेलू चिप डिजाइन और तकनीकी स्वावलंबन
केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि चिप डिजाइन के क्षेत्र में भी घरेलू स्टार्टअप्स, एमएसएमई और फैबलेस कंपनियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सिस्टम-ऑन-चिप (SoC) डिजाइन से जुड़ी कई परियोजनाओं को हरी झंडी मिल चुकी है और कई स्वदेशी चिप्स डिजाइन होकर निर्माण के अंतिम चरणों में हैं।
इन तमाम पहलों के जरिए भारत सेमीकंडक्टर निर्माण, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और स्वदेशी एआई विकास को एक साथ आगे बढ़ाते हुए वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।














