भारत में रसोई गैस की मांग में भारी कमी : आपूर्ति संकट ने बिगाड़ा गणित

नई दिल्ली (एजेंसी)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर अब भारत की रसोई तक पहुँचने लगा है। सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण मार्च महीने में देश में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की खपत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
खपत के आंकड़ों में बड़ी गिरावट
ताजा आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में एलपीजी की कुल खपत पिछले साल के मुकाबले 13% कम होकर 23.79 लाख टन पर सिमट गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 27.29 लाख टन था। पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) की रिपोर्ट इस गिरावट के पीछे की गंभीर स्थिति को दर्शाती है:
घरेलू आपूर्ति: घरों में इस्तेमाल होने वाली गैस की सप्लाई में 8.1% की कमी आई।
गैर-घरेलू क्षेत्र: कमर्शियल गैस (होटल और उद्योग) की आपूर्ति में 48% की भारी कटौती देखी गई।
थोक बिक्री: थोक बाजार में एलपीजी की बिक्री में 75% तक की कमी दर्ज की गई है।
कनेक्शन सरेंडर: पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की बढ़ती पहुंच के कारण लगभग 39,000 उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन वापस कर दिए हैं।
आपूर्ति बाधित होने का मुख्य कारण
भारत अपनी एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है। इस आयात का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते सऊदी अरब और यूएई से आता है।
संकट का प्रभाव: सैन्य तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग में आवाजाही प्रभावित हुई है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने रणनीतिक कदम उठाते हुए घरेलू उपभोक्ताओं (घरों) की जरूरतों को प्राथमिकता दी और औद्योगिक व कमर्शियल क्षेत्रों की आपूर्ति में कटौती की।
पेट्रोल-डीजल की मांग में तेजी, विमानन ईंधन स्थिर
एलपीजी के विपरीत, परिवहन ईंधन की मांग में मजबूती देखी गई है। मार्च के दौरान ईंधन की खपत के रुझान कुछ इस प्रकार रहे:
ईंधन प्रकार,मार्च में खपत,वृद्धि दर
डीजल,87.27 लाख टन,8.1% ↑
पेट्रोल,37.8 लाख टन,7.6% ↑
एविएशन फ्यूल (ATF),8.07 लाख टन,स्थिर
जहाँ एक ओर पेट्रोल और डीजल की मांग आर्थिक गतिविधियों के कारण बढ़ी है, वहीं विमानन ईंधन (ATF) की खपत पिछले साल के स्तर पर ही बनी रही। वर्तमान वैश्विक हालातों को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
















