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टेरर फंडिंग पर भारत का कड़ा रुख : UN में FATF का किया मजबूत बचाव, पाकिस्तान पर परोक्ष निशाना

संयुक्त राष्ट्र (एजेंसी)। भारत ने वैश्विक आतंकवाद-रोधी और धन शोधन रोधी (Anti-Money Laundering) निगरानी संस्था, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले देशों को कड़ा संदेश दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने साफ तौर पर कहा कि FATF की विश्वसनीयता को चुनौती देने की कोशिशें वास्तव में किसी प्रक्रियात्मक खामी की वजह से नहीं, बल्कि “जांच के डर” के कारण की जा रही हैं।

राजनीतिक सक्रियता नहीं, नियमों का पालन जरूरी

संयुक्त राष्ट्र के ‘काउंटर-टेररिज्म वीक’ के दौरान भारत और फ्रांस द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक विशेष सत्र में बोलते हुए पी. हरीश ने कहा:

“FATF की कार्रवाई पूरी तरह से तकनीकी, साक्ष्यों पर आधारित और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होती है। इस मंच की जांच से बचने के लिए संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों पर राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय, संबंधित देशों को अपनी कमियों को दूर करना चाहिए और नियमों का वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए।”

यद्यपि भारतीय प्रतिनिधि ने सीधे तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका यह बयान स्पष्ट रूप से पाकिस्तान की ओर इशारा करता है। बता दें कि अतीत में FATF की ‘ग्रे लिस्ट’ में रहने के दौरान पाकिस्तान ने इस संस्था पर राजनीतिक रूप से पक्षपाती होने का आरोप लगाया था।

सीमा पार आतंकवाद और नई तकनीकों की चुनौती

भारत ने इस बात पर जोर दिया कि वह दशकों से सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद का दंश झेल रहा है। इतिहास गवाह है कि गंभीर आतंकवादी वित्तीय जोखिम कभी भी स्वतंत्र रूप से पैदा नहीं हुए, बल्कि उन्हें कुछ देशों के सरकारी तत्वों द्वारा बढ़ावा और संरक्षण दिया गया है।

वर्तमान परिदृश्य में, डिजिटल और उभरती हुई तकनीकें अब आतंकी फंडिंग के स्रोतों और वित्तीय प्रवाह के तरीकों को और अधिक जटिल बना रही हैं।

भारत द्वारा उठाए गए कड़े कदम

मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के बदलते तरीकों से निपटने के लिए भारत ने अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई है:

वर्चुअल एसेट्स पर लगाम: भारत ने वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (जैसे क्रिप्टो एक्सचेंज) को अपने एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) कानून के दायरे में शामिल किया है।

सख्त सत्यापन: केंद्रीकृत एक्सचेंजों और उपयोगकर्ताओं के लिए ‘नो योर कस्टमर’ (KYC) और सत्यापन मानकों को बेहद कड़ा किया गया है।

पी. हरीश ने अंत में नसीहत देते हुए कहा कि जो देश अपनी जमीन, संस्थानों या वित्तीय प्रणालियों का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए होने देते हैं, उन्हें दुनिया में अस्थिरता फैलाना तुरंत बंद करना चाहिए। उन्हें अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाना होगा।

उल्लेखनीय है कि 40 सदस्यीय FATF और उसकी सहयोगी संस्था ‘एशिया/पैसिफिक ग्रुप ऑन मनी लॉन्ड्रिंग’ फिलहाल पाकिस्तान की वित्तीय गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

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