छत्तीसगढ़

उदयपुर विकासखंड में बुनियादी ढांचे का विस्तार : 14.64 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं की शुरुआत

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण अंचलों में परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। इसी कड़ी में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अंबिकापुर के उदयपुर विकासखंड में विकास की नई इबारत लिखते हुए चार प्रमुख सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनने वाली इन सड़कों की कुल अनुमानित लागत 1464.06 लाख रुपये है।

ग्रामीण विकास की नई जीवनरेखा

भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुदूर क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि सड़कें केवल कोलतार की परतें नहीं हैं, बल्कि ये शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के बंद रास्तों को खोलने वाली ‘विकास की धमनियां’ हैं। जब गांवों तक पक्की सड़कें पहुंचती हैं, तो किसानों को मंडी तक और मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में लगने वाला कीमती समय बचता है।

इन चार प्रमुख मार्गों का होगा कायाकल्प

परियोजना के विवरण के अनुसार, उदयपुर क्षेत्र के निम्नलिखित मार्गों पर निर्माण कार्य शुरू किया गया है:

पीडब्ल्यूडी रोड से शंकरपुर (खासपारा-मोरनीपारा): इस सबसे बड़ी परियोजना पर 671.99 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे स्थानीय यातायात सुगम और सुरक्षित होगा।

खरसुरा मार्ग से फुलचुही: 343.96 लाख रुपये की लागत से बनने वाली यह सड़क दूरस्थ गांवों के बीच बारहमासी संपर्क स्थापित करेगी।

रिखी से करोंधी (खुटरापारा): इस मार्ग के लिए 227.16 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं, जो क्षेत्रीय विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

देवटीकरा-रकेली से देवगढ़ मार्ग: 220.95 लाख रुपये के बजट से बनने वाली यह सड़क रकेली और देवगढ़ जैसे क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को मजबूती प्रदान करेगी।

सशक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प

मंत्री अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल रही है। उन्होंने क्षेत्रवासियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन निर्माण कार्यों के पूरा होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और उदयपुर विकासखंड में सुविधाओं का विस्तार होगा। सरकार का मुख्य लक्ष्य जन-आकांक्षाओं को पूरा करना और अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचाना है।

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