कर्नाटक सीएम का पलटवार : ₹1400 करोड़ की संपत्ति पर बोले- ‘सबकुछ पारदर्शी और वैध, कुमारस्वामी चाहें तो विधानसभा में करें बहस’

नई दिल्ली (एजेंसी)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपनी लगभग ₹1400 करोड़ की परिसंपत्तियों को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के बाजार मूल्य के अनुसार उनकी संपत्ति लगभग ₹1400 करोड़ है, जिसे उन्होंने पूरी तरह कानूनी तरीकों और नियमों के दायरे में रहकर अर्जित किया है। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी द्वारा इस संपत्ति वृद्धि को BMIC/NICE इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से जोड़ने के दावों को मुख्यमंत्री ने सिरे से खारिज कर दिया है।
दिल्ली में मीडिया से चर्चा करते हुए डीके शिवकुमार ने कहा कि उनके सभी वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों का पूरा विवरण आयकर विभाग के पास उपलब्ध है। इसके अलावा, उनके बच्चों को भी कानूनन कारोबार करने और अपने नाम पर संपत्ति खरीदने का पूरा अधिकार है। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल किया कि क्या एचडी कुमारस्वामी कोई आयकर अधिकारी हैं जो इस तरह के बेबुनियाद सवाल उठा रहे हैं।
कुमारस्वामी के NICE प्रोजेक्ट वाले आरोपों पर सफाई
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (BMIC/NICE) प्रोजेक्ट से जुड़ी कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए डीके शिवकुमार की संपत्तियों में हुई भारी बढ़ोतरी पर सवाल खड़े किए थे। कुमारस्वामी का दावा था कि शिवकुमार की घोषित संपत्ति 2003 में करीब ₹4 करोड़ थी, जो बढ़कर 2023 तक ₹1400 करोड़ के पार पहुंच गई। उन्होंने होसकरेहल्ली की जमीन और शोभा डेवलपर्स के साथ ज्वाइंट वेंचर का जिक्र कर भूमि सौदों में अनुचित लाभ मिलने का आरोप लगाया था, जिसे शिवकुमार ने पूरी तरह निराधार बताया।
‘क्या मैंने कोई रिश्वत ली या घोटाला किया?’
अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने कहा कि वह एक किसान और कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए उनके पास संपत्ति होना कोई गैरकानूनी बात नहीं है। उन्होंने चुनौती देते हुए पूछा कि क्या उन्होंने कभी कोई रिश्वत ली है या उन्हें किसी भ्रष्टाचार के मामले में रंगे हाथों पकड़ा गया है? संपत्तियों के मौजूदा मूल्य पर बात करते हुए उन्होंने पूर्व सीएम एस. बंगारप्पा के कार्यकाल का उदाहरण दिया, जब उन्होंने लगभग ₹99 हजार में एक प्लॉट खरीदा था, जिसकी आज की कीमत बढ़कर करीब ₹20 करोड़ हो चुकी है। उनके अनुसार, समय के साथ जमीनों और संपत्तियों के भाव बढ़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
कानूनी और नियमित खुलासे का दावा
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि वह हर साल नियमित रूप से अपनी संपत्ति का ब्योरा जनता और विभाग के सामने रखते हैं। चुनाव आयोग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी केंद्रीय एजेंसियां पहले ही उनके मामलों की जांच कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई अन्य एजेंसी भी इस मामले की जांच करना चाहती है, तो वह उसके लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।
‘विधानसभा के अंदर आकर करें खुली बहस’
एचडी कुमारस्वामी की ओर से दी गई बहस की चुनौती का जवाब देते हुए शिवकुमार ने कहा कि सदन की सीढ़ियों पर खड़े होकर बयानबाजी करने के बजाय यदि उनमें हिम्मत है, तो वे विधानसभा के भीतर आएं और तथ्यात्मक चर्चा करें। उन्होंने सुझाव दिया कि बहस के लिए कोई भी मौजूदा विधायक या एमएलसी अपनी सदस्यता से इस्तीफा देकर सदन में आ सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस तरह की राजनीतिक धमकियों या ब्लैकमेलिंग की राजनीति से डरने वाले नहीं हैं।
बीजेपी-जेडीएस गठबंधन पर निशाना
डीके शिवकुमार ने दावा किया कि वर्तमान में बीजेपी और जेडीएस गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर आपसी कलह और खींचतान मची हुई है, जिसके कारण कुमारस्वामी मीडिया में इस तरह के बयान दे रहे हैं।
शिक्षा नीति और ठेकेदारों के बकाये पर भी चर्चा
अपने दिल्ली दौरे के अन्य एजेंडे पर बोलते हुए शिवकुमार ने बताया कि वहां दक्षिणी राज्यों की शिक्षा नीति और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पेपर लीक जैसी घटनाओं पर लगाम लगाना था। इसके साथ ही, ठेकेदारों के लगभग ₹38 हजार करोड़ के बकाये के सवाल पर उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के फैसलों की वजह से वित्तीय दबाव बढ़ा है, जिसे सुलझाने के लिए मौजूदा सरकार जरूरी कदम उठा रही है।
















