मंत्री केदार कश्यप ने किया कंडरा आदिवासी समाज के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन, प्रतिभावान छात्र सम्मानित

रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने रायपुर के महादेव घाट में आयोजित ‘छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज’ के वार्षिक अधिवेशन और सम्मान समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने समाज के नवनिर्मित सामाजिक भवन का लोकार्पण किया। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा, खेलकूद और समाज सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले होनहार युवाओं को सम्मानित भी किया।
शिक्षा और एकता ही समाज की असली पूंजी: केदार कश्यप
समारोह को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि शिक्षा, मजबूत संगठन और अच्छे संस्कार ही किसी भी समुदाय की असली ताकत होते हैं। उन्होंने खुशी जताई कि आज आदिवासी समाज के युवा डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, उद्यमी और प्रशासनिक पदों पर पहुंचकर नई मिसाल पेश कर रहे हैं। युवाओं की यह सफलता एक प्रगतिशील और विकसित छत्तीसगढ़ की तस्वीर को दर्शाती है।
सामाजिक भवन से मिलेगा युवाओं को सही मार्गदर्शन
मंत्री कश्यप ने रेखांकित किया कि यह सामाजिक भवन केवल एक इमारत नहीं है, बल्कि यह आपसी संवाद, सांस्कृतिक गतिविधियों और एकता का प्रतीक बनेगा। यहाँ युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने और आगे बढ़ने के लिए उचित मार्गदर्शन व बेहतर माहौल मिल सकेगा।
सरकारी योजनाओं से मिल रहा है विकास को बढ़ावा
राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आदिवासी समाज के कल्याण के लिए निरंतर काम हो रहा है। नई शिक्षा नीति, कौशल विकास, छात्रवृत्ति, स्वरोजगार और महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने जैसी योजनाओं के जरिए समुदाय को एक मजबूत आधार प्रदान किया जा रहा है।
उन्होंने समाज के बुजुर्गों और वरिष्ठ नागरिकों से अपील की कि वे अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं, ताकि युवा अपनी जड़ों से जुड़े रहकर डिजिटल तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।
कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित
इस गरिमामयी अवसर पर छत्तीसगढ़ आदिवासी परंपरा औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष नंदकुमार साय, और छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज के अध्यक्ष वीरेंद्र कुंजाम सहित अनसूया मरकाम, तुलसी मरकाम, होरीलाल छेदैया, शांतनु मरकाम और कमल नारायण मरकाम समेत समाज के अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
















