उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार पर विपक्ष का तीखा हमला : अखिलेश से लेकर ममता और तेजस्वी तक ने भरी हुंकार

नई दिल्ली (एजेंसी)। राजधानी में आयोजित एक विशाल विपक्षी रैली के दौरान इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी की योगी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग लंबे समय से ‘डबल इंजन’ सरकार का दावा करते थे, वे अब राजनीतिक रूप से ‘डबल जीरो’ साबित हो चुके हैं।
अखिलेश यादव ने उठाए आंकड़े और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें 1.27 लाख वोट कम होने की बात कही गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर मुख्यमंत्री को इस बात की जानकारी और आंकड़े कहां से मिले। अखिलेश ने आरोप लगाया कि एमएलसी चुनाव में हार के बाद वे अपनी नाकामी छुपा नहीं पा रहे हैं, और चुनाव आयोग के साथ मिलकर वोटों की दोबारा गिनती करवाई गई, जिससे साबित होता है कि एक ही चुनाव में उन्हें दोहरी हार का सामना करना पड़ा है।
ममता बनर्जी का केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर प्रहार
रैली को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को दबाने की तमाम कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन लोकतंत्र की रक्षा के लिए वे अंतिम दम तक संघर्ष करेंगी। ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करके जनादेश को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने देश के युवाओं और नई पीढ़ी से आगे आकर देश और संविधान को बचाने की अपील की।
तेजस्वी यादव और अन्य नेताओं के तीखे तेवर
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने सॉफ्टवेयर और चुनावी व्यवस्था में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाएं आज निष्पक्ष रहने के बजाय सरकार के इशारों पर काम कर रही हैं। उन्होंने आरएसएस और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग खुद आजादी की लड़ाई से दूर रहे, वे आज दूसरों को देशभक्ति का पाठ पढ़ा रहे हैं।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी एकजुटता पर जोर दिया। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक चुनाव आयोग और व्यवस्था में निष्पक्षता बहाल नहीं होती, तब तक यह लोकतांत्रिक आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस मेगा रैली में समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं और सरकार की नीतियों के खिलाफ मजबूत विरोध दर्ज कराया गया।
















