बस्तर के प्रणेता : गोडबोले दंपति की सेवा साधना को मिला ‘पद्मश्री’ सम्मान

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल बस्तर में स्वास्थ्य और मानवता की अलख जगाने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और श्रीमती सुनीता गोडबोले को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे प्रदेश के लिए एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण बताया है।
मुख्यमंत्री ने इस सम्मान को जनसेवा, निष्ठा और संवेदनशीलता की जीत बताते हुए कहा कि गोडबोले दंपति का जीवन राष्ट्र निर्माण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
दुर्गम क्षेत्रों में जीवन का समर्पण
वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से इस दंपति ने अपना पूरा जीवन जनजातीय समाज के उत्थान में लगा दिया। बस्तर के बारसूर जैसे बेहद पिछड़े, संवेगात्मक और पहुंचविहीन क्षेत्रों में रहकर उन्होंने न केवल लोगों का मुफ्त इलाज किया, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति गहरी जागरूकता भी फैलाई।
उनकी इस निस्वार्थ यात्रा के प्रमुख स्तंभ निम्नलिखित हैं:
मुफ्त चिकित्सा और परामर्श: आधुनिक सुविधाओं से कटे ग्रामीणों तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना।
कुपोषण के खिलाफ जंग: वनवासी क्षेत्रों के बच्चों और महिलाओं को कुपोषण के चक्रव्यूह से बाहर निकालना।
विश्वास का माहौल: अंधविश्वास को दूर कर जनजातीय समाज में आधुनिक चिकित्सा के प्रति भरोसा पैदा करना।
“कठिन परिस्थितियों और बेहद सीमित संसाधनों के बीच समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए काम करना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है। गोडबोले दंपति की यह प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करेगी।”
— विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री (छत्तीसगढ़)
यह पुरस्कार केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि बस्तर के जंगलों में दशकों से बिना किसी प्रचार के दी जा रही उस मूक सेवा को राष्ट्रीय स्तर पर मिली एक बड़ी पहचान है। मुख्यमंत्री ने गोडबोले दंपति को बधाई देते हुए उनके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की है।
















