रायपुर में गरबा आयोजनों पर गरमाया माहौल : वक्फ बोर्ड ने की युवाओं से मर्यादा की अपील, बजरंग दल ने सौंपी 14 सूत्री मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नवरात्रि पर्व के दौरान आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों को लेकर धार्मिक परंपरा और सुरक्षा व्यवस्था पर बहस तेज हो गई है। राज्य वक्फ बोर्ड और बजरंग दल—दोनों ही संगठनों ने इन आयोजनों की पवित्रता और सुरक्षा को लेकर अपनी-अपनी बात रखी है।
मुस्लिम युवाओं के लिए वक्फ बोर्ड की सलाह
राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने स्पष्ट किया कि गरबा विशुद्ध रूप से एक धार्मिक आस्था का पर्व है, जिसे महज मनोरंजन का साधन नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम युवाओं को ऐसे कार्यक्रमों से दूर रहने का परामर्श दिया है।
डॉ. राज के अनुसार, यदि कोई मुस्लिम युवक कार्यक्रम में हिस्सा लेना चाहता है, तो उसे आयोजकों की पूर्व अनुमति लेनी चाहिए और अपनी असली पहचान उजागर करनी होगी। इसके साथ ही, आयोजनों की धार्मिक परंपराओं—जैसे आरती, पूजा-अर्चना, तिलक लगाने और कलावा बांधने जैसे नियमों का पूर्ण पालन करना अनिवार्य होगा। उन्होंने पहचान छिपाकर प्रवेश करने वालों पर चिंता जताते हुए स्पष्ट कहा कि गलत पहचान का सहारा लेकर माहौल खराब करने वालों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जानी चाहिए।
बजरंग दल का सख्त रुख और 14 सूत्रीय मांगें
दूसरी ओर, बजरंग दल के रायपुर जिला संयोजक भूषण साहू ने भी गरबा को व्यावसायिक इवेंट बनाने पर आपत्ति जताई है। संगठन ने स्थानीय प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपकर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने सहित 14 प्रमुख बिंदुओं पर दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रमुख सुझाव:
पहचान व जांच: पंडालों में प्रवेश से पहले पहचान पत्र (ID) का अनिवार्य सत्यापन और सुरक्षा जांच।
सुरक्षा इंतज़ाम: सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, पृथक प्रवेश-निकास द्वार और महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती।
मर्यादा का पालन: अश्लील संगीत, आपत्तिजनक गतिविधियों और नारों पर पूरी तरह से पाबंदी।
आपातकालीन सुविधाएं: अग्निशमन उपकरण, मजबूत विद्युत व्यवस्था, आपातकालीन निकास, प्राथमिक चिकित्सा और पर्याप्त पुलिस बल।
बजरंग दल ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की छेड़छाड़ या विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर आयोजक या आम जनता स्वयं कानून हाथ में न लें, बल्कि तुरंत पुलिस को सूचित कर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित कराएं।
फिलहाल वक्फ बोर्ड की अपील और बजरंग दल के मांग-पत्र ने शहर में चर्चा बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और गरबा आयोजन समितियों पर टिकी हैं कि वे आगामी त्यौहार के लिए क्या नियम और दिशा-निर्देश तय करते हैं।
















