गढ़िया पहाड़ का ‘चमत्कारी’ जलाशय : जहाँ कड़कती धूप में भी पानी रहता है लबालब

कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में गर्मी के मौसम में जहाँ अमूमन जलस्रोत दम तोड़ देते हैं, वहीं एक ऐसा स्थान भी है जो इस तपिश को चुनौती दे रहा है। समुद्र तल से लगभग 700 फीट की ऊँचाई पर, गढ़िया पहाड़ के शिखर पर एक ऐसा अनूठा तालाब स्थित है, जिसका पानी कभी कम नहीं होता। भीषण गर्मी में भी इसका लबालब भरे रहना न सिर्फ कौतूहल का विषय है, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए अटूट विश्वास का केंद्र भी है।
लोक मान्यता: राजा की बेटियों और जलदेवी की कथा
इस जलाशय को लेकर क्षेत्र में एक बेहद दिलचस्प पौराणिक कहानी प्रचलित है। इतिहास और राजपरिवार से जुड़े जानकारों के मुताबिक, यह पहाड़ी कभी राजा तनुदेव का मुख्य किला (गढ़) हुआ करती थी। शुरुआती दिनों में यहाँ पानी का संकट था और सिर्फ एक छोटा सा जलकुंड मौजूद था।
राजा की दो बेटियां थीं, जिनके नाम सोनई और रुपई थे। लोककथाओं के अनुसार, दोनों बहनों को जलदेवी की विशेष कृपा प्राप्त थी। एक बार खेलते समय उन्होंने जलदेवी की आराधना की, जिसके बाद वहाँ पानी का एक विशाल स्रोत फूट पड़ा। माना जाता है कि वे दोनों बहनें उसी जल में अंतर्ध्यान हो गईं और आज भी अदृश्य रूप से इस कुंड की सुरक्षा करती हैं। यही वजह है कि ग्रामीणों का मानना है कि दैवीय कृपा के कारण यह तालाब कभी खाली नहीं हो सकता।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: क्या है पानी न सूखने का असली कारण?
जहाँ एक तरफ लोगों की अपनी धार्मिक मान्यताएं हैं, वहीं विज्ञान इस रहस्य को भौगोलिक संरचना से जोड़कर देखता है। भूगोलशास्त्रियों का मानना है कि:
भूगर्भीय संरचना: प्राचीन काल में किसी प्राकृतिक उथल-पुथल या ज्वालामुखीय गतिविधि के कारण इस पहाड़ी की चोटी पर एक गहरा गड्ढा बन गया होगा।
चट्टानों की बनावट: यहाँ की चट्टानें ऐसी धातु या तत्वों से बनी हैं, जो पानी को नीचे सोखने (रिसाव होने) से रोकती हैं।
पर्यावरण का प्रभाव: पहाड़ के आसपास की घनी वनस्पतियाँ पानी को सहेजने में मदद करती हैं। साथ ही, अधिक ऊँचाई पर होने के कारण यहाँ मैदानी इलाकों की तुलना में तापमान थोड़ा कम रहता है, जिससे वाष्पीकरण (Evaporation) की दर धीमी हो जाती है।
आस्था और विज्ञान का अनूठा संगम
स्थानीय समाज के लिए यह जलाशय केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और श्रद्धा का प्रतीक है। दूर-दराज से लोग इस स्थान के दर्शन करने और पूजा-पाठ करने आते हैं।
कहानियों के अपने मायने हैं और विज्ञान के अपने तर्क, लेकिन इतनी ऊँचाई पर चिलचिलाती धूप में भी इस तालाब का पानी न सूखना आज भी हर किसी को विस्मय में डाल देता है। रहस्य और श्रद्धा का यह अनूठा संगम कांकेर के इस ऐतिहासिक स्थल को बेहद खास बनाता है।
















