बस्तर के टिन संग्राहकों के लिए ‘TIN पोर्टल’ लॉन्च, अब सीधे खाते में पहुंचेगा पैसा

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने जनजातीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी डिजिटल शुरुआत की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘TIN (ट्राइबल इंसेंटिव्स ऑन नेचुरल रिसोर्सेज़) पोर्टल’ का उद्घाटन किया। छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CMDC) और इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) के सहयोग से तैयार यह पोर्टल बस्तर संभाग के टिन अयस्क संग्राहकों के लिए टिन की खरीद, परिवहन, बिक्री और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगा।
TIN पोर्टल की मुख्य विशेषताएं और लाभ
पारदर्शी मूल्य निर्धारण: लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) के आधार पर टिन की दरें तय होंगी, जिससे संग्राहकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार सही कीमत मिलेगी।
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT): बिक्री की राशि सीधे आदिवासियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और भुगतान में देरी नहीं होगी।
डिजिटल ट्रैकिंग व सत्यापन: पहचान के लिए क्यूआर कोड और स्मार्ट कार्ड, ऑनलाइन स्टॉक मैनेजमेंट, ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग और एसएमएस अलर्ट की सुविधा दी गई है।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग: CMDC मुख्यालय से लेकर खरीदी केंद्रों तक पूरी प्रक्रिया पर डिजिटल नजर रखी जाएगी।
केंद्रों का विस्तार और नई SOP
बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा (बचेली, कटेकल्याण, चिकपाल) और सुकमा (तोंगपाल, नामा, चिंतलनार) में फिलहाल 6 क्रय केंद्र संचालित हैं। जनजातीय संग्राहकों की सुविधा के लिए बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा में 3 नए केंद्र खोलने की योजना है।
इसके साथ ही CMDC ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की है:
जांच प्रक्रिया हुई सस्ती: सैंपल की संख्या 12 से घटाकर 6 की गई है और मानकीकरण 50 ग्राम रखा गया है।
लागत में कमी: मासिक विश्लेषण शुल्क 14,400 रुपये से घटकर 7,200 रुपये हो गया है, जिससे CMDC को सालाना लगभग 10 लाख रुपये की बचत होगी।
आजीविका और वित्तीय आंकड़े
साल 2013 से संगठित टिन संग्रहण व्यवस्था को अब डिजिटल रूप देकर एक मजबूत आजीविका मॉडल बनाया जा रहा है:
वित्त वर्ष 2024-25: 8,707.2 किग्रा टिन अयस्क के लिए 90.82 लाख रुपये का भुगतान।
वित्त वर्ष 2025-26: 20,895.335 किग्रा टिन अयस्क के लिए 3.81 करोड़ रुपये का भुगतान।
















