छत्तीसगढ़

भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण का विजय शर्मा ने किया निरीक्षण

कवर्धा। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भोरमदेव क्षेत्र में ‘स्वदेश दर्शन योजना’ के अंतर्गत बन रहे 146 करोड़ रुपये के महत्वाकांक्षी कॉरिडोर प्रोजेक्ट की जमीनी प्रगति का जायजा लिया। काम की रफ्तार और बारीकियों को समझने के लिए उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ पूरे निर्माण क्षेत्र का पैदल दौरा किया और इसके बाद सर्किट हाउस में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में पर्यटन विभाग के प्रबंध निदेशक (एमडी) विवेक आचार्य सहित निर्माण एजेंसियों के इंजीनियर और ठेकेदार मौजूद रहे।

भोरमदेव कॉरिडोर प्रोजेक्ट की विस्तृत समीक्षा

समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट के हर हिस्से पर चल रहे काम की बारीकी से पड़ताल की। मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:

बुनियादी ढांचा और सौंदर्यीकरण: मंदिर परिसर का बेस वर्क, प्रवेश द्वार, संग्रहालय, परिसर की लैंडस्केपिंग और स्थानीय सरोवर का सौंदर्यीकरण।

समय-सीमा और गुणवत्ता पर कड़ा रुख: डिप्टी सीएम ने साफ किया कि यह प्रोजेक्ट भविष्य की जरूरतों को देखकर बनाया जा रहा है, इसलिए गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए मैनपावर और मशीनरी बढ़ाने के निर्देश दिए।

साप्ताहिक मॉनिटरिंग: अधिकारियों को हर सोमवार होने वाली प्रगति की रिपोर्ट सौंपने और नियमित रूप से फील्ड में रहकर काम की निगरानी करने को कहा गया है।

स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण

उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि कॉरिडोर के प्रवेश द्वार, खंभों और दीवारों पर फणी नागवंशी स्थापत्य शैली की नक्काशी की जाए, ताकि यहां आने वाले लोग छत्तीसगढ़ की प्राचीन और समृद्ध संस्कृति से सीधे जुड़ सकें। इसके साथ ही प्रवेश द्वार पर एक भव्य और विशाल नंदी प्रतिमा स्थापित करने की योजना है।

प्रोजेक्ट के तहत क्षेत्र के अन्य प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों जैसे मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ और सरोदा डैम के विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई।

आदिवासी संग्रहालय और पर्यटक सुविधाएं

इतिहास का प्रदर्शन: क्षेत्र में बन रहे आदिवासी संग्रहालय का विस्तार किया जाएगा, जिसमें भोरमदेव के पौराणिक इतिहास और मंदिर निर्माण की गाथा को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया जाएगा।

नागरिक सुविधाएं: पर्यटकों, विशेषकर महिलाओं की सुविधा के लिए उचित दूरी पर व्यवस्थित और साफ-सुथरे शौचालयों के निर्माण के निर्देश दिए गए हैं।

पर्यावरण संरक्षण: आगामी मानसून को देखते हुए खुले इलाकों में लैंडस्केपिंग के साथ पीपल, बरगद और नीम जैसे पारंपरिक पौधों का रोपण तुरंत शुरू करने को कहा गया है।

इस महत्वपूर्ण बैठक में राजीव लोचन महाराज, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी सहित क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ और निर्माण विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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