अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर मनमाने शुल्क के खिलाफ एकजुट हुए 60 देश, होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद गहराया

नई दिल्ली (एजेंसी)। दुनिया के अति-महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों पर जहाजों की मुक्त आवाजाही को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रकार के शुल्क और प्रतिबंधों का विरोध करने के लिए वैश्विक स्तर पर 60 देशों ने एक साझा मोर्चा खोला है। यूरोपीय संघ (EU) के नेतृत्व में शुरू हुई इस पहल में ब्रिटेन, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख राष्ट्र शामिल हुए हैं।
सभी सदस्य देशों ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जहाजों की सुरक्षा और सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास द्वारा जारी इस घोषणापत्र में कहा गया है कि किसी भी देश द्वारा जहाजों से जबरन शुल्क वसूलना, भेदभावपूर्ण नियम लागू करना या पूर्व-अनुमति जैसी शर्तें थोपनीय नहीं हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz)?
ओमान और ईरान के बीच स्थित होर्मुज की खाड़ी विश्व व्यापार, विशेषकर ऊर्जा आपूर्ति का सबसे संवेदनशील केंद्र है। वैश्विक स्तर पर खपत होने वाले कुल कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) का लगभग पांचवां हिस्सा इसी पतले समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।
हाल ही में ईरान द्वारा नेविगेशन व सुरक्षा सेवाओं के नाम पर यहाँ से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क (टोल) लगाने की योजना पेश की गई थी, जिसके बाद वैश्विक स्तर पर व्यापारिक समुदाय और नौवहन कंपनियों में गहरी चिंता व्याप्त हो गई थी।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम जनता पर असर
समुद्री रास्तों पर रुकावट या अतिरिक्त टैक्स लगाए जाने से अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई (Freight Charges) काफी महंगी हो जाती है। इसका सीधा असर कच्चे तेल, गैस और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है।
इसी संभावित संकट को टालने के लिए 60 देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के कड़ाई से पालन की मांग की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वैश्विक दबाव के बाद इस साझा घोषणा पत्र का व्यवहारिक असर क्या रहता है।
















