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रोज़ाना 30 मिनट की इंटरवल वॉक से सेहत को पाँच शानदार लाभ

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। हम सभी जानते हैं कि रोज़ाना टहलना सेहत के लिए कितना फ़ायदेमंद होता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि पूरा लाभ पाने के लिए 10,000 कदम चलना ज़रूरी है, पर यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। आपके उठाए गए कदमों की संख्या से ज़्यादा आपकी वॉक करने का तरीका मायने रखता है। यही कारण है कि अगर आप रोज़ाना सिर्फ़ 30 मिनट की इंटरवल वॉकिंग करते हैं, तो आपको कई आश्चर्यजनक फ़ायदे (Interval Walking Benefits) मिल सकते हैं।

दरअसल, इंटरवल वॉकिंग एक खास जापानी तकनीक है। यह कदमों की गिनती (स्टेप काउंट) की बजाय वॉक करने के तरीक़े पर ध्यान केंद्रित करती है। अगर आप इसे नियमित तौर पर अपनी दिनचर्या में शामिल कर लेते हैं, तो आपकी सेहत में ऐसे सकारात्मक बदलाव आएँगे जिन्हें देखकर आप हैरान रह जाएँगे। आइए जानते हैं इंटरवल वॉकिंग के मुख्य फ़ायदे और इसे करने का सही तरीका।

इंटरवल वॉकिंग के अद्भुत फ़ायदे

इंटरवल वॉकिंग को अपनी रूटीन का हिस्सा बनाने से आपको ये पाँच बड़े लाभ मिल सकते हैं:

हृदय स्वास्थ्य को मज़बूती: तेज़ गति से चलने के दौरान आपकी हृदय गति (Heart Rate) बढ़ जाती है। यह एक छोटे कार्डियो वर्कआउट की तरह काम करता है। इससे आपके दिल की मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं और पूरे शरीर में रक्त संचार (Blood Circulation) बेहतर होता है।

तेज़ी से वज़न घटाने में सहायक (फैट बर्निंग): हाई इंटेंसिटी इंटरवल (तेज़ चलने के छोटे अंतराल) शरीर की कैलोरी जलाने की क्षमता को बढ़ा देते हैं। यह प्रक्रिया सिर्फ़ वॉक के दौरान ही नहीं, बल्कि उसके बाद भी जारी रहती है, जिसे आफ़्टरबर्न इफ़ेक्ट कहते हैं। इस तरह यह वज़न कम करने की प्रक्रिया में काफ़ी मदद करती है।

पैरों की मांसपेशियों को टोन करे: जब आप तेज़ चाल से चलते हैं, तो आपके पैरों की प्रमुख मांसपेशियाँ—जैसे कि जांघ की मांसपेशियाँ (क्वाड्रिसेप्स), हैमस्ट्रिंग और पिंडलियाँ (काफ़ मसल्स)—पर ज़्यादा ज़ोर पड़ता है। इससे टाँगों की मांसपेशियाँ मज़बूत और सुडौल (टोन्ड) बनती हैं।

ब्लड शुगर पर बेहतर नियंत्रण: यह ख़ास वॉकिंग तकनीक शरीर में इंसुलिन संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) को बेहतर बनाने में मदद करती है, जो रक्त शर्करा (Blood Sugar) के स्तर को सही सीमा में बनाए रखने के लिए बेहद ज़रूरी है।

जोड़ों को सुरक्षा और सहनशक्ति (स्टैमिना) में वृद्धि: इंटरवल वॉकिंग में, धीमी और तेज़ गति के बीच बदलाव होने से, आपके घुटनों और अन्य जोड़ों पर लगातार एक जैसा अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। इससे दर्द या चोट लगने का ख़तरा कम हो जाता है। इसके साथ ही, यह धीरे-धीरे आपके शरीर की कुल सहनशक्ति (स्टैमिना) को भी बढ़ाती है।

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